बागपत नगर पालिका अध्यक्ष पद से हटाए गए: भ्रष्टाचार, करोड़ों की हेराफेरी और भू-माफिया को संरक्षण देने का आरोप
तीसरी बार अध्यक्ष बने राजुद्दीन पर शासन की बड़ी कार्रवाई; डीएम संभालेंगी नामित प्रशासक की जिम्मेदारी
बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में शासन ने नगर पालिका परिषद बागपत के अध्यक्ष राजुद्दीन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। राजुद्दीन पर भू-माफिया को संरक्षण देने, नगर पालिका की जमीनों पर कब्जे कराने और करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी करने जैसे गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं।
क्या हैं राजुद्दीन पर मुख्य आरोप?
वर्ष 2023 में लगातार तीसरी बार अध्यक्ष बने राजुद्दीन के खिलाफ बागपत गन्ना समिति के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने अप्रैल 2023 में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के बाद निम्नलिखित गंभीर अनियमितताएं सामने आईं:
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सरकारी खजाने को हानि: आरोप है कि राजुद्दीन ने नगर पालिका की खाली हुई दुकानों का आवंटन नियम विरुद्ध तरीके से किया, जिससे सरकारी खजाने को ₹1 करोड़ 39 लाख की बड़ी हानि हुई।
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अवैध प्लॉटों का रिकॉर्ड: उन्होंने 10, 20, 50, और 100 रुपये के स्टाम्प पेपर के आधार पर 739 प्लॉटों को संपत्ति कर के रिकॉर्ड में दर्ज कराया। इनमें से केवल 39 के ही कागजात पूरे पाए गए, जबकि शेष के लिए बैनामों के वैध कागजात नहीं थे।
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करोड़ों का नुकसान: इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हुए और सरकार को स्टाम्प शुल्क का भुगतान नहीं किया गया, जिससे राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
जांच और शासन का आदेश
प्रदीप ठाकुर की शिकायत के बाद, आरोपों की जांच बागपत के एडीएम द्वारा कराई गई।
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पहली रिपोर्ट: मई 2023 में एडीएम की रिपोर्ट शासन को भेजी गई, जिसके आधार पर राजुद्दीन से जवाब मांगा गया।
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दोष सिद्ध: उनके जवाब की गहन जांच के बाद शासन ने पाया कि राजुद्दीन के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप सही थे।
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अंतिम आदेश: अप्रैल 2025 में दोबारा जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद, नगर निकाय के प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद ने राजुद्दीन को अध्यक्ष पद से हटाने के निर्देश जारी कर दिए, जिसका आदेश बृहस्पतिवार को डीएम बागपत को प्राप्त हो गया।
प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद ने राजुद्दीन को पालिका निधि को हानि पहुंचाने, उसका दुरुपयोग करने और नगर निकाय हित के विरुद्ध कार्य करने का दोषी मानते हुए पद से हटाने का आदेश दिया है।
डीएम ने संभाली जिम्मेदारी
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि शासन के आदेशानुसार कार्रवाई की जा रही है। राजुद्दीन को पद से हटा दिया गया है और अब नामित प्रशासक के तौर पर बागपत जिलाधिकारी स्वयं नगर पालिका परिषद की जिम्मेदारी संभालेंगी।
अन्य घोटालों की भी चल रही जांच
राजुद्दीन पर केवल भू-माफिया को संरक्षण देने के ही आरोप नहीं हैं। पक्का घाट पर श्मशान घाट निर्माण में घोटाला, केतीपुरा में कब्रिस्तान की जमीन पर भू-माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए इंटरलॉकिंग लगाना, और सब्जी मंडी में अवैध दुकानों के निर्माण जैसे कई अन्य आरोपों की जांच भी चल रही है।
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