गाजियाबाद। संसद और राज्यसभा में पारित हुए वक्फ संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज़ हो गई है। जहां भाजपा और उनके समर्थकों में बिल के पास होने को लेकर उत्साह का माहौल है, वहीं मुस्लिम समाज और उससे जुड़े संगठनों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के उत्तर प्रदेश प्रदेश महासचिव हाजी आरिफ ने बिल को मुस्लिम विरोधी करार दिया है।
मुज़फ्फरनगर में अफसरों ने गर्मी की चिंता की शुरू, बताया-कैसे रखे भीषण गर्मी से बचाव, दिए टिप्स !
गाजियाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हाजी आरिफ ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों पर अधिकार जमाने और मुस्लिम समाज को हाशिए पर धकेलने की मंशा से यह बिल लाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वक्फ संशोधन का प्रभाव केवल वर्ष 2025 के बाद की संपत्तियों पर पड़ेगा, तो फिर इससे पहले की वक्फ संपत्तियों के लिए नए बिल की क्या आवश्यकता थी?
तितावी में सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की दर्दनाक मौत, परिजनों में मचा कोहराम
हाजी आरिफ ने आगे कहा कि सरकार वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए जो कमेटी गठित करेगी, उसमें केवल हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल होंगे—इसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन यदि सरकार वाकई निष्पक्षता दिखाना चाहती है, तो उसे अन्य धार्मिक स्थलों की संपत्तियों जैसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा आदि की निगरानी समितियों में भी मुस्लिम समाज के लोगों को शामिल करना चाहिए। तभी यह माना जा सकता है कि सरकार का इरादा सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार का है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार केवल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को निशाना बना रही है, जिससे मुस्लिम समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है और आक्रोश पनप रहा है। हाजी आरिफ ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड को कमजोर करना सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का हनन है और यह लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है।
इस बिल को लेकर कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर सरकार का हस्तक्षेप संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
फिलहाल, यह बिल मुस्लिम समाज के बीच एक नई बहस और असंतोष का कारण बन गया है, जिसकी गूंज देशभर में सुनाई दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और गर्मा सकता है।