भारत बनेगा ग्लोबल डेटा पावरहाउस: एयरटेल-रिलायंस-अदाणी-टाटा का 50 अरब डॉलर निवेश, क्षमता 9 गुना बढ़ेगी
India Data Center: भारत में डेटा सेंटर सेक्टर तेज रफ्तार से विस्तार कर रहा है। रिलायंस, अदाणी, एयरटेल और टाटा जैसी कंपनियां अगले पाँच से सात वर्षों में 50 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने जा रही हैं। इससे मौजूदा 1 गीगावॉट क्षमता बढ़कर 9 गीगावॉट तक पहुंच जाएगी, जो एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
टाटा समेत सभी दिग्गजों का आक्रामक प्रवेश
डेटा खपत में ऐतिहासिक उछाल
भारत में डेटा उपभोग 2016-17 के 8 एक्साबाइट से बढ़कर 2024-25 में 229 एक्साबाइट हो गया है। जेफरीज के अनुसार, 2030 तक क्षमता 8 गीगावॉट तक पहुंचने की संभावना है, जिसके लिए लगभग 30 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।
2030 तक तीन कंपनियां रखेंगी 40% बाजार हिस्सेदारी
जेफरीज रिपोर्ट बताती है कि एयरटेल, रिलायंस और अदाणीकॉनेक्स मिलकर देश की डेटा सेंटर क्षमता का 35–40% हिस्सा अपने पास रखेंगे। वहीं क्रिसिल का अनुमान है कि कंपनियां 2026–28 के बीच 55,000–60,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी, जिससे क्षमता 2.3–2.5 गीगावॉट हो जाएगी।
भारत बना दुनिया का डेटा पावर मार्केट
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर बाज़ारों में शामिल हो चुका है। दुनिया का 20% डेटा भारत में उत्पन्न होता है, लेकिन अब तक देश केवल 3% डेटा ही घरेलू स्तर पर सहेज पाया है। सबसे अधिक वायरलेस इंटरनेट इस्तेमाल के कारण भारत प्राकृतिक रूप से डेटा उत्पादन केंद्र बन चुका है।
चार दिग्गज कंपनियों की बड़ी योजनाएँ
- रिलायंस:
जामनगर में 1GW AI डेटा सेंटर की घोषणा के बाद कंपनी ब्रुकफील्ड और डिजिटल रियल्टी के साथ विशाखापत्तनम में भी 1GW एआई डेटा सेंटर बनाएगी। - अदाणी:
अदाणी ने गूगल के साथ 15 अरब डॉलर के AI डेटा सेंटर के लिए समझौता किया है और पहले से एजकॉनेक्स के साथ 50:50 JV संचालित कर रहा है। - एयरटेल:
नेक्स्ट्रा डेटा पहले ही 15% बाजार हिस्सेदारी रखता है। भारत में हाइपरस्केलर्स कुल डेटा सेंटर खपत का 60% हिस्सा उपयोग करते हैं। - टाटा:
टीसीएस टीपीजी के साथ ‘हाइपरवॉल्ट’ प्लेटफॉर्म पर 1.2GW क्षमता विकसित करेगा, जिसे आगे क्लाउड व एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस किया जाएगा।
भारत में लागत सबसे कम - यही है सबसे बड़ी ताकत
भारत में डेटा सेंटर निर्माण लागत दुनिया में सबसे कम, मात्र 7 डॉलर प्रति वॉट है। बिजली की कीमतें अमेरिका से 20% सस्ती हैं। अक्टूबर 2024 तक देश में 452.7 गीगावॉट की स्थापित क्षमता है, जिसमें 46.3% नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है। यह वैश्विक ऑपरेटरों के लिए भारत को सबसे आकर्षक डेस्टिनेशन बनाता है।
