FY26 में भारतीय अर्थव्यवस्था नई ऊँचाइयों पर: एसबीआई रिपोर्ट में 7.6% GDP ग्रोथ का अनुमान, एमएसएमई क्रेडिट में ऐतिहासिक उछाल
SBI Report India GDP: एसबीआई रिसर्च की ताज़ा इकोरैप रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि 7.6% रहने का अनुमान है। रिपोर्ट बताती है कि घरेलू मांग में निरंतर सुधार, उद्योगों के बेहतर प्रदर्शन और सेवाओं के क्षेत्र में तेज़ी ने जीडीपी को एक मज़बूत आधार दिया है। विनिर्माण और सेवाओं में लगातार हो रहे व्यापक सुधारों ने FY26 के संपूर्ण आर्थिक परिदृश्य को और बेहतर किया है।
दूसरी तिमाही में 8.2% की छलांग: छह तिमाहियों में सबसे तेज़ वृद्धि
FY26 के अंत तक 4.1 ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ता भारत
एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि देश की सकल नाममात्र जीडीपी FY26 के अंत तक लगभग 4.1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को छू सकती है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में और भी मजबूत स्थिति में खड़ा कर सकती है और इसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में और ऊपर ले जाएगी।
पहली छमाही में 8% वास्तविक जीडीपी ग्रोथ, आगे भी रफ्तार बरकरार
रिपोर्ट कहती है कि FY26 की पहली छमाही में वास्तविक जीडीपी में 8% की बढ़त दर्ज की गई। यदि तीसरी तिमाही में 7.5–7.7% और चौथी तिमाही में लगभग 7% की वृद्धि बरकरार रहती है, तो पूरे वर्ष की आर्थिक वृद्धि 7.6% के अनुमान तक पहुंच सकती है। नाममात्र GDP में Q2 की 8.7% वृद्धि भी एक सकारात्मक संकेत है।
नाममात्र और वास्तविक GDP के अंतर में ऐतिहासिक कमी
रिपोर्ट में बताया गया है कि FY23 की पहली तिमाही में वास्तविक और नाममात्र GDP के बीच 12 प्रतिशत अंकों का अंतर था, जो अब घटकर मात्र 0.5 प्रतिशत अंक रह गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में महंगाई स्थिर हो रही है और घरेलू मांग एक नए स्तर पर पहुंच चुकी है।
कोर GVA में 8.5% वृद्धि: घरेलू मांग बनी मुख्य आधार
कृषि और सार्वजनिक वित्त को छोड़कर कोर ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 8.5% की तेज़ वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले साल की 5.6% वृद्धि से काफी ज्यादा है। रिपोर्ट बताती है कि यह वृद्धि घरेलू मांग आधारित अर्थव्यवस्था, सेवाओं के बढ़ते निर्यात और कम महंगाई की संयुक्त देन है।
सेक्टरवार मजबूत प्रदर्शन ने बढ़ाया विश्वास
रिपोर्ट में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन भी उजागर किया गया है-
- कृषि: 3.5% वृद्धि
- उद्योग: 7.7% वृद्धि (पिछले साल 3.8%)
- विनिर्माण: 9.1% की तेज़ छलांग
- सेवाएं: 9.2% वृद्धि
- खर्च अब उत्पादक उपयोग की ओर बढ़ता हुआ
रिपोर्ट के अनुसार निजी खपत में 7.9% वृद्धि और कैपिटल फॉर्मेशन में 7.3% की बढ़त दर्ज की गई है। कैपिटल गुड्स, रसायन और रेयर अर्थ मेटल्स के आयात में बढ़ोतरी तेज निवेश गतिविधियों का संकेत देती है। वहीं सोने जैसी मूल्यवान वस्तुओं की मांग में कमी यह दर्शाती है कि उपभोक्ताओं का खर्च धीरे-धीरे उत्पादक दिशा में मुड़ रहा है।
16 साल के औसत से 5.5 गुना तेज़ क्रेडिट ग्रोथ
एसबीआई की रिपोर्ट की सबसे बड़ी खोज एमएसएमई सेक्टर में ऐतिहासिक क्रेडिट ग्रोथ है। FY2009 से FY2025 तक एमएसएमई ऋण में कुल 19.87 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जिसका वार्षिक औसत लगभग 1.17 लाख करोड़ रहा। लेकिन FY26 के पहले सात महीनों में ही एमएसएमई क्रेडिट 3.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रुझानों के अनुसार FY26 में यह वृद्धि 6.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है जो पिछले 16 वर्षों के औसत से 5.5 गुना ज्यादा है।
भारत की आर्थिक वृद्धि व्यापक आधार तक पहुंची
रिपोर्ट बताती है कि एमएसएमई वृद्धि यह संकेत देती है कि देश की आर्थिक प्रगति अब व्यापक स्तर पर गहराई तक पहुंच चुकी है। छोटे और मध्यम उद्यम इस विकास यात्रा के केंद्र में आ गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई भी आगामी नीति बैठक में तटस्थ रुख अपनाते हुए ब्याज दरों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दे सकता है।
