निर्माण से लेकर कृषि तक अर्थव्यवस्था में रौनक, पर निजी कारों की गिरती बिक्री ने बढ़ाई असली चिंता
India GDP: वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2) के लिए जारी जीडीपी आंकड़ों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की एक मिश्रित लेकिन उत्साहजनक तस्वीर पेश की है। MoSPI की ताजा रिपोर्ट में जहां कमर्शियल वाहनों की तेज बिक्री और निर्माण क्षेत्र में रफ्तार देखने को मिली है, वहीं निजी कारों की सुस्ती ने मध्यम वर्ग की बढ़ती आर्थिक चुनौतियों को उजागर कर दिया है। दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.2% तक पहुंची, जोकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही से काफी बेहतर है।
कमर्शियल वाहनों की मजबूत वापसी
सीमेंट और स्टील की खपत बढ़ने से बाज़ार में रौनक
रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। सरकार की सड़क, पुल और शहरी विकास परियोजनाओं ने निर्माण क्षेत्र को नई गति दी है। सीमेंट उत्पादन में लगभग दोगुनी वृद्धि और स्टील की भारी खपत इस सेक्टर की मजबूती को दर्शाती है। हालांकि निर्माण सामग्री की लगातार बढ़ती मांग का असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है, जिससे घर बनाने की लागत 5–10% तक बढ़ने की संभावना है।
चावल की बंपर पैदावार से महंगाई पर काबू की उम्मीद
सब-हेडिंग: चावल उत्पादन वृद्धि 1.1% से बढ़कर 2.9%, खाद्य कीमतों में स्थिरता की संभावना
महंगाई से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए कृषि क्षेत्र से राहत की खबर है। चावल की उत्पादन वृद्धि पिछले साल की तुलना में लगभग तीन गुना बढ़ गई है। इससे न केवल खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि चावल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद भी बढ़ गई है। ग्रामीण आय में सुधार और बाजार में बेहतर आपूर्ति से मिड-डे मील, राशन योजनाओं और उपभोक्ता खर्च पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
निजी कारों की बिक्री धीमी
हालांकि ऑटो सेक्टर में कमर्शियल वाहनों की बिक्री तेज है, लेकिन निजी कारों की मांग कमजोर पड़ी है। निजी वाहनों की बिक्री वृद्धि दर 5.9% पर आ गई है, जोकि पिछले वर्ष के 9.9% की तुलना में काफी कम है। यह संकेत देता है कि मध्यम वर्ग महंगाई, बढ़ी ब्याज दरों और EMI के दबाव के कारण बड़े खर्चों को टाल रहा है। कंपनियों को बिक्री बढ़ाने के लिए भारी डिस्काउंट और फेस्टिव ऑफर का सहारा लेना पड़ा है।
डिजिटल सेक्टर ने दिखाई नई ताकत
डिजिटल इंडिया के प्रयासों को मजबूती देने वाला एक और अहम संकेत टेलीकॉम सेक्टर से आया है। देश में टेलीफोन ग्राहकों की संख्या में 3.2% की वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्र तेजी से डिजिटल कनेक्टिविटी अपनाता जा रहा है। यूपीआई पेमेंट्स, ऑनलाइन सेवाओं, ई-कॉमर्स और डिजिटल हेल्थकेयर का विस्तार अब बड़े शहरों से निकलकर दूर-दराज़ गांवों तक पहुंचने लगा है।
इकोनॉमी की रफ्तार बनी हुई है, लेकिन डिमांड साइड में कमजोरी बरकरार
दूसरी तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था का सप्लाई साइड बेहद मजबूत है, उत्पादन, निर्माण और लॉजिस्टिक्स में तेजी साफ देखी जा सकती है। लेकिन मांग पक्ष विशेषकर शहरी मध्यम वर्ग अब भी खर्च बढ़ाने के लिए आश्वस्त नहीं है। महंगाई के डर और ऊंची EMI के बोझ ने उपभोग को धीमा कर दिया है। इसके चलते रिटेल, ऑटो और उपभोक्ता वस्तुओं के सेक्टर पर दबाव बना हुआ है।
निवेशकों में बढ़ा भरोसा, लेकिन असली चुनौती है मध्यम वर्ग की खरीद क्षमता लौटाना
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर मानते हैं कि GDP की मजबूत गति और सुधारते क्रेडिट ग्रोथ से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कॉरपोरेट आय में वृद्धि हो सकती है। हालांकि अब सरकार की असली चुनौती सप्लाई साइड की इस तेजी को मांग साइड तक पहुंचाना है यानी मध्यम वर्ग की खर्च करने की क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत करना। जब तक उपभोग चक्र तेज नहीं होगा, आर्थिक सुधार पूरी तरह सफल नहीं माना जा सकता।
