द्वितीय विश्व युद्ध से गीता महोत्सव तक: 'मन की बात' में पीएम मोदी ने देश की शांति-करुणा परंपरा को किया याद
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र के मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' के 128वें एपिसोड का प्रसारण रविवार को हुआ। इस दौरान पीएम मोदी ने महाभारत से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध तक का जिक्र किया।
" पीएम मोदी ने पिछले दिनों कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होने पर खुद को सौभाग्यशाली बताया। उन्होंने कहा, "कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होना भी मेरे लिए बहुत विशेष रहा। मैं ये देखकर बहुत प्रभावित हुआ कि कैसे दुनियाभर के लोग दिव्य ग्रंथ गीता से प्रेरित हो रहे हैं। इस महोत्सव में यूरोप और सेंट्रल एशिया सहित विश्व के कई देशों के लोगों की भागीदारी रही है।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "इस महीने की शुरुआत में सऊदी अरब में पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर गीता की प्रस्तुति की गई है।
यूरोप के लातविया में भी एक यादगार गीता महोत्सव आयोजित किया गया। इस महोत्सव में लातविया, एस्टोनिया, लिथुआनिया और अल्जीरिया के कलाकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।" पीएम मोदी ने कहा, "भारत की महान संस्कृति में शांति और करुणा का भाव सर्वोपरि रहा है। आप दूसरे विश्व युद्ध की कल्पना कीजिए, जब चारों ओर विनाश का भयावह माहौल बना हुआ था। ऐसे मुश्किल समय में गुजरात के नवानगर के जाम साहब, महाराजा दिग्विजय सिंह जी ने जो महान कार्य किया, वो आज भी हमें प्रेरणा देता है। उस समय जाम साहब किसी सामरिक गठबंधन या युद्ध की रणनीति को लेकर नहीं सोच रहे थे बल्कि उनकी चिंता ये थी कि कैसे विश्व युद्ध के बीच पोलिश यहूदी बच्चों की रक्षा हो।"
