केंद्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 18 युवाओं ने विकसित किए स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के प्रोटोटाइप
नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में 18 युवा अभियंताओं ने स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के कई प्रोटोटाइप विकसित किए हैं। उन्होंने उद्योग की जरूरतों के अनुसार नियंत्रण और स्वचालन आधारित तकनीकी समाधान भी तैयार किए, जिनसे इस क्षेत्र में नए अवसरों की संभावनाएं बढ़ी हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम में सी-डैक नोएडा की इलेक्ट्रॉनिक टॉय प्रयोगशाला का उद्घाटन भी किया गया। इसके तहत देशभर से चयनित विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पूर्वोत्तर क्षेत्र से आने वाले युवा अभियंताओं को एक वर्ष का व्यापक प्रशिक्षण दिया जाता है। पहले छह माह तक प्रतिभागी सी-डैक नोएडा की प्रयोगशाला में खिलौना डिजाइन, अनुसंधान और विकास का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं, जबकि अगले छह माह उन्हें उद्योग में प्रशिक्षण दिया जाता है। पूरी अवधि के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षु को 25 हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता भी दी जाती है।
प्रयोगशाला का उद्घाटन करते हुए मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अमितेश कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों का तेजी से बढ़ता बाजार है और तकनीकी नवाचार इस उद्योग को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम आने वाले वर्षों में अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देगा।
समारोह में मंत्रालय की अनुसंधान एवं विकास प्रमुख सुनीता वर्मा, सी-डैक नोएडा के कार्यकारी निदेशक विवेक खनेजा, टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि अनिर्बन गुप्ता, लेगो समूह के अधिकारी और इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग से जुड़े अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
