कुंभ- 2026 की तैयारी या उद्योगपतियों का खेल? तपोवन में पेड़ काटने पर महाराष्ट्र में उबाल
Maharashtra New: नासिक के तपोवन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। स्थानीय नागरिक, पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। अब इस विवाद में दो बड़े राजनीतिक चेहरे- राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे- भी शामिल हो गए हैं, जिससे मामला और गरमाता जा रहा है। लोगों का कहना है कि पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को गंभीर क्षति होगी और सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
कुंभ से पहले 1,670 पेड़ हटाने की मंजूरी पर विरोध
राज ठाकरे के तीखे आरोप-“सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही”
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार कुंभ मेले के बहाने पेड़ों की कटाई कर जमीन उद्योगपतियों को सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने टकराव का रास्ता चुना तो मनसे जनता के साथ खड़ी होकर मुकाबला करेगी। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि “नए पेड़ लगाने का वादा सिर्फ दिखावा है, कभी पूरा नहीं होता।”
नासिक दौरे पर पहुँचे सयाजी शिंदे
अभिनेता और राकांपा नेता सयाजी शिंदे ने तपोवन का दौरा कर सरकार को चेतावनी दी कि अगर पेड़ों की कटाई जारी रही तो वे भी सरकार के खिलाफ खड़े होंगे। इससे साफ है कि मुद्दा सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब सरकार गठबंधन में भी मतभेद उभर रहे हैं।
मनसे का दावा- “हमने शानदार काम किए, पेड़ काटने की जरूरत नहीं पड़ी”
मनसे ने कहा कि जब पार्टी नासिक महापालिका में सत्ता में थी, तब भी कुंभ मेला आयोजित हुआ था और तब पेड़ों को काटने की कोई जरूरत नहीं पड़ी थी। राज ठाकरे ने तंज किया कि यदि सरकार के पास पांच गुना पेड़ लगाने की जगह है, तो वहीं साधु ग्राम क्यों नहीं बनाया जाता?
हिंदुत्व के नाम पर भ्रष्टाचार
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि तपोवन वह स्थान है जहाँ भगवान राम, सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान समय बिताया था। वहां पेड़ काटना हिंदुत्व नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार है। उन्होंने भाजपा पर ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया।
