जम्मू हादसे में शहीद हुआ झज्जर का जवान,गांव में छाया मातम
झज्जर। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिला में गुरुवार को सेना की गाड़ी खाई में गिरने से अन्य जवानों के साथ शहीद हुए झज्जर जिले के बहादुर सैनिक का पार्थिव शरीर मौसम खराब होने की वजह से शुक्रवार को दोपहर बाद तक भी गांव गिजाडोद स्थित उनके पैतृक घर नहीं पहुंच पाया। गुरुवार की देर शाम सूचना मिलने के बाद से ही परिवार में मातम छाया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जम्मू कश्मीर में सैनिकों की गाड़ी गहरी खाई में गिरने से हुए हादसे में जांबाज मोहित चौहान के शहीद होने की सूचना आने के बाद से ही पैतृक गांव गिजाडोद में शोक छा गया। मोहित के घर में गांव वालों की भीड़ लग गई। हर कोई गमगीन नजर आया। त्रिवेणी पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष श्रीनिवास छिकारा ने भी शहीद सैनिक मोहित चौहान को श्रद्धांजलि अर्पित की है। मोहित लगभग पांच साल पहले सेना में भर्ती हुए थे। अब से साल भर पहले ही उनका विवाह हुआ था। बीते नवंबर महीने में मोहित अपने विवाह की वर्षगांठ मनाने के लिए घर आए थे। नवंबर में मोहित जल्द ही दोबारा आने का वादा कर ड्यूटी के लिए लौट गए थे। इस छोटी सी अवधि में वह खुद तो नहीं आ पाए, लेकिन गत गुरुवार को उनके शहीद होने की खबर आ गई।
गांव के सरपंच नरेश ने बताया कि बहादुर मोहित परिवार का बड़ा बेटा था। मोहित का छोटा भाई जितेंद्र गांव में गाड़ी चलाने का काम करता है। पिता सतपाल खेती करते हैं। कड़ी मेहनत करके और पढ़ाई में भी अच्छी योग्यता हासिल करके मोहित सेना में भर्ती हुए और अब देश की रक्षा करते हुए जान दे दी। मोहित चौहान के शहीद होने की बात गांव में पता चलते ही लोगों के बीच मोहित को लेकर चर्चा चलने लगी। लोग उनके देश के प्रति सेवा भाव और सेना में जाकर देश सेवा के किस्से आपस में सुनाने लगे। गांव के निवासी विनोद ने बताया कि मोहित के हृदय में सेना के प्रति लगाव की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। मोहित पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे। सेना की तैयारी के लिए गांव की सड़कों पर दौड़ लगाते थे। 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में की थी। वह प्रतिदिन गांव से लगभग चार किलोमीटर दूर गांव सिलानी के सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते थे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
