अधिक भोजन, अधिक धन और सामान से बचें – संयमित जीवन के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
पहली बात भोजन की है। हमें आवश्यकता से अधिक खाना नहीं चाहिए। जरूरत से कम खाने पर थोड़ी पोषण की कमी हो सकती है, लेकिन कोई गंभीर हानि नहीं होती। लेकिन स्वाद या लालच में अधिक खाने से स्वास्थ्य खराब होता है।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात धन के संग्रह की है। जितना धन कमाएं, वह परिश्रम और ईमानदारी से कमाया गया होना चाहिए। केवल आवश्यकतानुसार बचत करें, शेष धन पुण्य कार्यों में खर्च करें। यह धन ही वास्तविक रूप से आपका “सच्चा संग्रह” कहलाता है, जो जन्मों तक पुण्य का स्रोत बनता है।
अधिक भोजन, अधिक वस्तु संग्रह, और धन का अनावश्यक संग्रह—तीनों अनाधिकार प्रयास हैं। दूसरों का हक मारना पाप है।
संक्षेप में, यह पाठ हमें संतुलन, विवेक और दानशीलता की शिक्षा देता है। जीवन में जरूरत से अधिक का लालच न रखें, संतुलित जीवन जिएं, और अपने साधन समाज और धर्मार्थ कार्यों में लगाएं।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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