वास्तु विशेष: घर का मुख्य द्वार ही तय करता है आपकी किस्मत, जानें दिशाओं का सच और सुख-समृद्धि के अचूक उपाय
अक्सर लोग घर बनवाते समय आधुनिक डिजाइन और चकाचौंध पर तो लाखों खर्च कर देते हैं, लेकिन घर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से—'मुख्य प्रवेश द्वार' को नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्रवेश द्वार केवल लकड़ी या लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि घर की 'आत्मा' है। यहीं से घर में सकारात्मक ऊर्जा, खुशहाली और लक्ष्मी का आगमन होता है। यदि यह द्वार सही दिशा और पद पर न हो, तो जीवन में बिना वजह की परेशानियां दस्तक देने लगती हैं।
दिशाओं का भ्रम और हकीकत
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दक्षिण दिशा (ऊर्जा और स्थिरता): दक्षिण मुखी घर हमेशा खराब नहीं होते। यदि द्वार सही स्थान पर हो, तो यह दिशा धन, यश और समाज में भारी सम्मान दिलाती है। गलत पद होने पर ही मानसिक तनाव और आर्थिक हानि होती है।
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पूर्व दिशा (नई ऊर्जा और स्वास्थ्य): सूर्य की इस दिशा में बना द्वार बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के लिए उत्तम है। यह आत्मविश्वास बढ़ाता है, लेकिन गलत स्थान पर होने से घर में आलस्य बढ़ सकता है।
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उत्तर दिशा (कुबेर और अवसर): उत्तर दिशा को धन का द्वार माना गया है। करियर और व्यापार में तरक्की के लिए इस दिशा का द्वार आय के नए स्रोत खोलता है।
मुख्य द्वार के लिए 5 जरूरी वास्तु टिप्स
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बनावट: मुख्य दरवाजा हमेशा घर के अन्य दरवाजों से थोड़ा बड़ा और मजबूत होना चाहिए।
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साफ-सफाई: टूटा हुआ या चरमराता (आवाज करने वाला) दरवाजा नकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
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रोशनी: द्वार के सामने कभी अंधेरा न रखें। प्रवेश द्वार पर पर्याप्त रोशनी होना सौभाग्य की निशानी है।
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अवरोध: दरवाजे के ठीक सामने कूड़ा, शौचालय या भारी पत्थर जैसी चीजें ऊर्जा के प्रवाह को रोकती हैं।
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सुंदरता: द्वार को सुंदर और साफ रखने से सकारात्मक सोच और सुखद माहौल घर में प्रवेश करता है।
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