अमेरिका ने अपनी रक्षा रणनीति में चीन और इंडो-पैसिफिक को पहली प्राथमिकता दी
वाशिंगटन। अमेरिका ने चीन और इंडो-पैसिफिक को लेकर एक अहम कदम उठाया है। चीन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा योजना के केंद्र में रखा गया है। रक्षा विभाग की ओर से जारी 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में यह भी चेतावनी दी गई है कि इस क्षेत्र पर नियंत्रण से वैश्विक आर्थिक शक्ति तय होगी और यह सीधे तौर पर अमेरिका की सुरक्षा, स्वतंत्रता व समृद्धि को आकार देगा।
चीन की आंतरिक चुनौतियों को स्वीकार करते हुए अमेरिकी रक्षा रणनीति में कहा गया है कि बीजिंग ने यह दिखाया है कि वह अपनी सेना पर और अधिक खर्च कर सकता है और उसे प्रभावी ढंग से कर सकता है। 26 पन्नों की इस अघोषित रणनीति में यह भी कहा गया है कि वाशिंगटन का मकसद टकराव या शासन परिवर्तन नहीं है, बल्कि किसी एक शक्ति को क्षेत्र पर हावी होने से रोकना है। इसमें कहा गया है, "हमारा लक्ष्य सरल है: चीन सहित किसी को भी हम पर या हमारे सहयोगियों पर हावी होने से रोकना।" इसके साथ ही, डिफेंस स्ट्रैटेजी में स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका 'चीन पर हावी' नहीं होना चाहता, न ही उन्हें दबाना या अपमानित करना चाहता है। पेंटागन का कहना है कि वह 'डिटरेंस बाय डिनायल' की रणनीति अपनाएगा, जिसका मकसद यह पक्का करना है कि हमला शुरू होने से पहले ही नाकाम हो जाए। इस दृष्टिकोण के तहत अमेरिका 'फर्स्ट आइलैंड चेन के साथ एक मजबूत बचाव प्रणाली' बनाएगा और क्षेत्रीय सहयोगियों व पार्टनर्स से सामूहिक रक्षा में ज्यादा योगदान देने का आग्रह करेगा।
रणनीति में इस बात का भी जिक्र है कि इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी सैन्य तैनाती का उद्देश्य कूटनीति का समर्थन करना है, न कि उसे कमजोर करना। दस्तावेज में कहा गया है, "एक सम्मानजनक शांति संभव है, जो अमेरिकियों के लिए फायदेमंद शर्तों पर हो, लेकिन जिसे चीन भी स्वीकार कर सके।" इसमें इसे बीजिंग के साथ संबंधों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नजरिए का आधार बताया गया है। रक्षा विभाग ने कहा है कि वह रणनीतिक स्थिरता, टकराव से बचाव और तनाव कम करने के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ मिलिट्री-टू-मिलिट्री कम्युनिकेशन बढ़ाने की कोशिश करेगा।
इन प्रयासों के साथ अमेरिकी शक्ति का स्पष्ट प्रदर्शन भी किया जाएगा, ताकि अमेरिकी नेता मजबूत स्थिति से बातचीत कर सकें। रक्षा विभाग की रणनीति में हिंद-प्रशांत को सीधे घरेलू समृद्धि से जोड़ा गया है और तर्क दिया गया है कि अमेरिका का औद्योगिकीकरण इस क्षेत्र के बाजारों और समुद्री मार्गों तक सुरक्षित पहुंच पर निर्भर करता है। हालांकि दस्तावेज में स्पष्ट है कि अमेरिकी सेना 'दुनिया में कहीं भी लक्ष्यों के खिलाफ विनाशकारी हमले और ऑपरेशन' करने की क्षमता बनाए रखेगी, जिसमें सीधे अमेरिकी धरती भी शामिल है, ताकि प्रतिरोध की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। रणनीति में कहा गया है कि अन्य खतरे बने रहने के बावजूद मातृभूमि की रक्षा और चीन को रोकना वे प्रमुख मिशन हैं जो सैन्य तैनाती और निवेश के निर्णयों को आकार दे रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।
