'सिटी मजिस्ट्रेट' को 'DM आवास', पर 'बंधक' बनाया गया, लखनऊ से फोन पर कहा गया-'साला पंडित पागल' हो गया है, सिटी मजिस्ट्रेट को अब जान का खतरा !
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक अभूतपूर्व प्रशासनिक विद्रोह देखने को मिला है। जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस्तीफा देने के बाद मजिस्ट्रेट ने जिलाधिकारी (DM) पर उन्हें बंधक बनाने और लखनऊ से फोन पर उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
सोमवार शाम करीब 7:30 बजे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री डीएम अविनाश सिंह से मिलने उनके आवास पहुंचे थे। बाहर निकलने के बाद भावुक और आक्रोशित मजिस्ट्रेट ने मीडिया को बताया, "मुझे डीएम आवास के भीतर 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। बातचीत के दौरान जिलाधिकारी के पास लखनऊ से एक फोन आया, जिसमें फोन करने वाले ने गाली देते हुए कहा— 'साला पंडित पागल हो गया है, इसे रात भर बंधक बनाकर रखो'।" उन्होंने दावा किया कि बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडे की सतर्कता और मीडिया के दखल के बाद ही उन्हें वहां से निकलने दिया गया।
इस्तीफे की असली वजह: आस्था और कानून का विरोध
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने 5 पन्नों के त्यागपत्र में यूजीसी (UGC) के नए कानून को 'काला कानून' करार दिया है। साथ ही, उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई बदसलूकी और उनकी चोटी पकड़े जाने की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पोस्टर लहराते हुए कहा कि प्रशासन और सरकार ब्राह्मणों और संतों के विरुद्ध काम कर रही है, जिसे एक सनातन प्रेमी होने के नाते वे बर्दाश्त नहीं कर सकते।
दबाव बनाने की कोशिश और इस्तीफा
मजिस्ट्रेट का आरोप है कि उन पर मानसिक तनाव और काम के दबाव का बहाना बनाकर इस्तीफा देने का दबाव डाला गया, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने जिलाधिकारी के कॉल रिकॉर्ड्स की जांच की मांग की है। वर्तमान में उन्होंने सरकारी आवास खाली कर दिया है और अपने समर्थकों व ब्राह्मण संगठनों के साथ मिलकर आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है।
इस घटनाक्रम पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार को संतों के अपमान के परिणामों का अनुमान लगा लेना चाहिए। फिलहाल, प्रशासन ने अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है, लेकिन बरेली का राजनीतिक पारा पूरी तरह चढ़ चुका है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
