प्रधानमंत्री मोदी के 'मन की बात' का 130वां एपिसोड, जानें 10 बड़ी बातें
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' के 130वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने स्टार्ट अप इंडिया की यात्रा, देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था समेत कई मुद्दों पर बात की। आईए कार्यक्रम की 10 बड़ी बात पर एक नजर डालते हैं। मन की बात की शुरुआत में गणतंत्र दिवस का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 26 जनवरी को हम सभी गणतंत्र दिवस का पर्व मनाएंगे, इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। 26 जनवरी का ये दिन हमें अपने संविधान निर्माताओं को नमन करने का अवसर देता है।
इस प्रयास के तहत 10 से अधिक जलाशयों को जीवनदान मिला है। जेन जी के बीच भजन क्लबिंग की लोकप्रियता पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज के युवाओं ने भक्ति को अपनी जीवनशैली में ढाल लिया है। युवा इकट्ठा हो रहे हैं, संगीत हो रहा है। कंसर्ट में भक्तिभाव से भजन गाए जा रहे हैं। इसे भजन क्लबिंग कहा जा रहा है, जो जेन जी के बीच लोकप्रिय हो रहा है। दुनिया के अलग-अलग कोने में देश के त्योहार मनाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति और त्योहार दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं। दुनिया भर में भारत के त्योहार बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। देश के लोग विदेश में भी अपनी संस्कृति की मूल भावना को संरक्षित कर और उसे आगे बढ़ा रहे हैं। मलेशिया में 500 से ज्यादा तमिल स्कूल हैं जहां तमिल भाषा की पढ़ाई के साथ ही अन्य विषयों को भी तमिल में पढ़ाया जाता है।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा है। आमतौर पर जब कोई 18 साल का हो जाता है और मतदाता बन जाता है तो उसे जीवन का एक सामान्य पड़ाव समझा जाता है। लेकिन, ये अवसर किसी भी भारतीय के जीवन का बहुत बड़ा माइलस्टोन होता है। पीएम मोदी ने आह्वान करते हुए कहा कि बहुत जरूरी है कि हम देश में मतदाता बनने का उत्सव मनाएं। मन की बात में मिलेट्स का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मिलेट के प्रति लोगों का लगाव लगातार बढ़ रहा है। 2023 को हमने मिलेट वर्ष घोषित किया था, लेकिन आज तीन साल बाद इसे लेकर जो पैशन है, वो उत्साहित करने वाला है। कई मंदिर हैं जो अपने प्रसाद में सिर्फ मिलेट का उपयोग करते हैं। मिलेट से अन्नदाताओं की कमाई बढ़ने के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य में सुधार का उदाहरण बनता है। स्वच्छता के प्रति युवाओं की भागीदारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के युवा स्वच्छता के प्रति सजग हैं। अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में युवाओं का समूह उन हिस्सों की सफाई के लिए एकजुट हुआ, जहां इसकी जरूरत थी।
युवाओं ने कई इलाकों में अभियान चलाया और अब तक करीब 11 लाख किलो से अधिक कचरे की सफाई कर चुके हैं। बेंगलुरु में कुछ प्रोफेशनल 'सोफा वेस्ट' को सॉल्व कर रहे हैं। चेन्नई में ऐसी ही एक टीम ने बेहतरीन काम किया है। एक उदाहरण के साथ पर्यावरण संरक्षण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के कूचबिहार के रहने वाले बैनोई दास ने खुद के पैसों से हजारों पेड़ लगाए। अब इलाके में हरियाली काफी ज्यादा बढ़ गई है। पर्यावरण संरक्षण की यही भावना बड़े स्तर पर भी दिखाई दे रही है। इसी सोच के तहत एक पेड़ मां के नाम अभियान चलाया जा रहा है। अब तक देश में 200 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं। हमारे देश के लोग अब पर्यावरण को लेकर ज्यादा जागरूक हैं।
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लेखक के बारे में
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रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।
