रबात। उत्तर अफ्रीकी देश मोरक्को इस समय भेड़ों की भारी कमी से जूझ रहा है। बीते 29 वर्षों में पहली बार मोरक्को सरकार ने अपने नागरिकों से ईद-उल-अजहा के मौके पर पारंपरिक कुर्बानी और भोज से परहेज करने की अपील की है। इस बार देश में सूखे और आर्थिक संकट के कारण भेड़ों की उपलब्धता बेहद कम है, जिससे उनकी कीमतें आसमान छू रही हैं। इस स्थिति को देखते हुए मोरक्को के राजा मोहम्मद VI ने एक अभूतपूर्व निर्णय लेते हुए नागरिकों से अपील की है कि वे इस साल कुर्बानी न करें और इस त्योहार को सादगी से मनाएं।
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मोरक्को के इस्लामी मामलों के मंत्री अहमद तौफीक ने सरकारी अल औला टेलीविजन पर राजा मोहम्मद VI का संदेश पढ़ते हुए कहा कि “देश को मौजूदा परिस्थितियों को स्वीकार करना चाहिए और जरूरतमंद लोगों के लिए कुर्बानी न करने का फैसला लेना चाहिए।” उन्होंने बताया कि चरागाहों की कमी, भेड़ों की ऊंची कीमत और महंगाई के कारण सरकार ने यह कदम उठाने का फैसला किया है।
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मोरक्को में भेड़ों की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। मोरक्कन सेंटर फॉर सिटिजनशिप के एक सर्वेक्षण के अनुसार, देश के 55% परिवार मानते हैं कि वे भेड़ खरीदने और त्योहार के लिए आवश्यक अन्य सामान जुटाने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में औसत मासिक घरेलू आय 302 डॉलर (लगभग 25,000 रुपये) है, जबकि कई बार एक भेड़ की कीमत इससे भी अधिक हो जाती है।
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मोरक्को पिछले छह वर्षों से गंभीर सूखे की चपेट में है, जिसके कारण मुद्रास्फीति में तेजी से वृद्धि हुई है। सरकार के अनुसार, इस बार बारिश पिछले 30 वर्षों के औसत से 53% कम हुई है, जिससे भेड़ों और मवेशियों की संख्या 2016 से 38% तक घट गई है। चरागाहों की भारी कमी और चारे की महंगाई ने भेड़ों की कीमतों को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है।
सरकार ने पशुधन पर सब्सिडी देने के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और रोमानिया से भेड़ों का आयात भी किया है, लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं कर पाया। देश में लगातार बढ़ती खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर ट्रेड यूनियनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया है। उनका मानना है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार के प्रयास अपर्याप्त हैं।
यह पहली बार नहीं है जब मोरक्को के किसी शासक ने कुर्बानी न करने की अपील की है। इससे पहले राजा हसन द्वितीय ने अपने शासनकाल में तीन बार इसी तरह के आदेश जारी किए थे। हालांकि, यह 29 वर्षों में पहली बार है जब इस तरह की अपील की गई है।
कुछ नागरिकों ने महंगाई और भेड़ों की कमी के कारण इस निर्णय का समर्थन किया है, जबकि कुछ लोग इसे धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध मान रहे हैं।