Thursday, April 3, 2025

मुज़फ्फरनगर में बेटे के इलाज में खर्च कर दी पाईं-पाई, नहीं बचे अंतिम संस्कार के भी पैसे, रात भर बेटे की लाश लिए बैठी रही अभागी मां

मुजफ्फरनगर। एक अभागी मां ने अपने बेटे को बचाने के लिए पाई-पाई खर्च कर दी और अंतिम संस्कार के भी पैसे नहीं बचे, तो रातभर शमशान घाट के गेट पर बेटे की लाश लिए बैठी रहीं। इस मामले की जानकारी समाजसेविका शालू सैनी को मिली, तो उन्होंने शव का अंतिम संस्कार कराया।
एक विधवा मां शारदा और उसके बेटे के लिए गरीबी उनकी किस्मत ही नहीं, अभिशाप भी बन गई। अभागिन मां ने अपने 22 साल के बीमार  बेटे को बचाने की खातिर अपनी पाई-पाई खर्च कर दी और उसके पास कफन खरीदने तक के लिए पैसे नहीं बचे। अंतिम संस्कार के इंतजार में वह श्मशानघाट के बाहर बिलखती रहीं ।
जानकारी पर साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की अध्यक्ष शालू सैनी श्मशान घाट पहुंचीं और अंतिम संस्कार कराया। शालू पिछले दस दिन में ऐसे सात लोगों का अंतिम संस्कार कर चुकी हैं।
आजमगढ़ से रोजगार के लिए एक साल पहले मां शारदा के साथ मुजफ्फरनगर आए राहुल ने एक फैक्ट्री में दिहाड़ी पर काम शुरू किया था। नौकरी के कुछ माह बाद उसके फेफड़ों में संक्रमण हो गया। उसने मजदूरी करने के साथ-साथ जिला अस्पताल में इलाज भी कराया, लेकिन संक्रमण से मुक्ति नहीं मिल पाई। यहां के डॉक्टरों ने उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए कहा। मां राहुल को मेरठ ले गई, जहां एक माह तक उपचार के बाद रविवार को उसकी मौत हो गई।
राहुल की मौत होने पर मुफलिसी में जी रही मां पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा। अभागी मां शारदा के पास उसके अंतिम संस्कार के भी पैसे नहीं बचे थे। इस बात की जानकारी होने पर मेडिकल कॉलेज के स्टाफ ने मानवीयता दिखाते हुए मेडिकल की एंबुलेंस से शव को मुजफ़्फ़रनगर के नई मंडी शमशान घाट पर भिजवा दिया था, जहां पर अभागी मां पूरी रात शव को लेकर बैठ रही है। जानकारी मिलते ही साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की शालू सैनी वहां पहुंची और शव का अंतिम संस्कार कराया।
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