Wednesday, February 28, 2024

‘न्यू इंडिया’ ने समुद्री डकैती और तस्करी को बर्दाश्त न करने की प्रतिज्ञा ली है: राजनाथ

नयी दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विश्व व्यापारिक समुदाय को आश्वस्त किया कि ‘न्यू इंडिया’ ने समुद्री डकैती और तस्करी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करने की प्रतिज्ञा ली है।

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सिंह ने नौसेना डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में आयोजित समारोह में नौसेना के पहले विशाल सर्वेक्षण पोत आईएनएस संधायक (यार्ड 3025) नौसेना के बेड़े में शामिल किये जाने के मौके पर कहा कि यह पोत हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत की एक महाशक्ति के रूप में भूमिका को और मजबूत करेगा तथा शांति और सुरक्षा बनाए रखने में भारतीय नौसेना की मदद करेगा।

 

रक्षा मंत्री ने नौसेना की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल भारतीय जहाजों, बल्कि मित्र देशों के जहाजों को भी सुरक्षा प्रदान कर रही है। उन्होंने हाल ही में अदन की खाड़ी में एक ब्रिटिश जहाज पर ड्रोन हमले का जिक्र किया, जिसके परिणामस्वरूप तेल टैंकरों में आग लग गई। उन्होंने आग बुझाने में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए भारतीय नौसेना की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रयास को दुनिया ने पहचाना और सराहा।

 

सिंह ने पिछले कुछ दिनों में पांच समुद्री डकैती के प्रयासों को विफल करने और ड्रोन तथा मिसाइलों से हमला किए गए जहाजों की सहायता करने के अलावा 80 मछुआरों एवं नौसैनिकों को बचाने के लिए भी भारतीय नौसेना की सराहना की। उन्होंने कहा, “ हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना शांति और समृद्धि सुनिश्चित करते हुए सुरक्षित व्यापार की सुविधा प्रदान कर रही है। कई रक्षा विशेषज्ञ इसे एक महाशक्ति का उदय बता रहे हैं। हर किसी की रक्षा करना, हमारी संस्कृति है। ”

 

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ती ताकत के साथ, भारत न केवल क्षेत्र से, बल्कि पूरे विश्व से अराजकता को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विभिन्न देशों के बीच नौवहन, व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता बनाए रखने के भारत के रुख को दोहराया। उन्होंने कहा, “हमारी बढ़ती शक्ति का उद्देश्य नियम-आधारित विश्व व्यवस्था सुनिश्चित करना है। हमारा उद्देश्य हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अवैध और अनियमित मछली पकड़ने को रोकना है। नौसेना इस क्षेत्र में नशीले पदार्थों और मानव तस्करी को रोक रही है। यह न केवल समुद्री डकैती रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि इस पूरे क्षेत्र को शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। आईएनएस संध्याक हमारे उद्देश्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार जिस इरादे से नौसेना को मजबूत कर रही है, उससे विश्व शांति का प्रवर्तक बनने की हमारी नियति साकार होगी।”

 

सिंह ने हिंद महासागर को वैश्विक व्यापार के लिए हॉटस्पॉट बताते हुए अरब सागर में व्यापारिक जहाजों पर अपहरण के प्रयासों और समुद्री डाकुओं से जहाजों को बचाने के लिए भारतीय नौसेना के साहस और तत्परता का जिक्र किया और कहा, “ हिंद महासागर में अदन की खाड़ी आदि जैसे कई चोक पॉइंट मौजूद हैं, जिनके माध्यम से बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है। इन अवरोध बिंदुओं पर कई खतरे बने हुए हैं, जिनमें से सबसे बड़ा खतरा समुद्री डाकुओं से है।,” उन्होंने आश्वस्त किया कि ‘न्यू इंडिया’ ने समुद्री डकैती और तस्करी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करने की प्रतिज्ञा ली है।

आई एनएस संध्याक की प्राथमिक भूमिका सुरक्षित समुद्री नौवहन को सक्षम बनाने की दिशा में बंदरगाहों, नौवहन चैनलों ,मार्गों, तटीय क्षेत्रों और गहरे समुद्रों का पूर्ण पैमाने पर हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करना है। अपनी दूसरी भूमिका में, जहाज कई प्रकार के नौसैनिक अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।

 

रक्षा मंत्री ने आशा व्यक्त की कि आईएनएस संधायक महासागरों के बारे में जानकारी प्राप्त करने और देश के साथ-साथ दूसरों की रक्षा करने के दोहरे उद्देश्य को हासिल करने में काफी मदद करेगा। उन्होंने कहा, “समुद्र विशाल और अथाह है। जितना अधिक हम इसके तत्वों का पता लगाने में सक्षम होंगे, उतना ही हमारा ज्ञान बढ़ेगा और हम मजबूत बनेंगे। जितना अधिक हम महासागर, इसकी पारिस्थितिकी, इसकी वनस्पतियों और जीवों के बारे में जानकारी एकत्र करेंगे, हम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के उतने ही करीब पहुंचेंगे। जितना अधिक हम महासागर के बारे में जानेंगे, उतना ही अधिक सार्थक रूप से हम अपने रणनीतिक हितों को पूरा करने में सक्षम होंगे,”।

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