Tuesday, January 14, 2025

पीएम मोदी के नेतृत्व में 2027 में हम दुनिया का तीसरे नंबर का अर्थतंत्र बन जाएंगे: अमित शाह

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में ’37वीं इंटेलिजेंस ब्यूरो सेंचुरी एंडोमेंट लेक्चर’ दिया। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले 5 साल में देश में कई प्रकार के खतरों से निर्णायक लड़ाई लड़कर वर्चस्व स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि पांच साल पहले तक हमारे देश के सामने दशकों से चले आ रहे तीन नासूर-पूर्वोत्तर, वामपंथी उग्रवाद और कश्मीर देश की शांति, कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और भविष्य को चैलेंज दे रहे थे।

मोदी सरकार की सख्त नीतियों और कठोर निर्णयों के कारण हमारी आने वाली पीढ़ी को इन तीनों खतरों की चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमने इन खतरों पर लगभग निर्णायक विजय प्राप्त कर ली है। इन तीनों क्षेत्रों में हिंसक घटनाओं में 70 प्रतिशत और मृत्यु में लगभग 86 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सूचना ब्यूरो की कार्यपद्धति, सतर्कता, सक्रियता, निर्णायक भूमिका निभाना और यश लेने के समय किसी और को आगे करने की त्याग और समर्पण की एक परंपरा ने आज देश को सुरक्षित रखा हुआ है। पिछले 10 साल में आसूचना ब्यूरो की तत्परता, तीक्षणा और परिणाम लाने की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। आसूचना ब्यूरो ने अपनी निष्ठा, साहस, त्याग और समर्पण की परंपरा को न केवल बरकरार रखा है बल्कि इसे आगे भी बढ़ाया है।

अमित शाह ने आगे कहा कि वर्तमान स्थिति में इंटेलिजेंस इकोसिस्टम के प्रभाव को चार डायमेंशन में विभाजित किया जा सकता है क्रमश: समाज, संप्रभुता, सुरक्षा और सजगता। उन्होंने कहा कि इन सबके बीच में सीमलेस कम्युनिकेशन के बिना आज हम पूरे देश को सुरक्षित नहीं रख सकते। एक सुरक्षित समाज ही आर्थिक और सामाजिक विकास की नींव रखने में सक्षम होता है। इंटेलिजेंस इकोसिस्टम द्वारा समय पर खतरों की पहचान कर उन्हें समाप्त करना ही समाज में विश्वास और स्थिरता बनाए रखता है। अगर हमें नक्सलवाद, आतंकवाद, संगठित अपराध, विभाजनकारी ताकतों, सांप्रदायिकता, नारकोटिक्स और असामाजिक तत्वों को पूरी तरह नियंत्रण में रखना है तो हमारे लिए समाज की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और साइबर स्पेस जैसे क्षेत्रों में हो रहे तेज परिवर्तनों के प्रति सजगता बढ़ानी पड़ेगी।

आज सिर्फ भौतिक नुकसान करने वाले देशविरोधी तत्वों से सजग रहने से ही हमारा काम पूरा नहीं होता और हमें आज के परिदृश्य में सजगता के मायने बदलने पड़ेंगे। इंफॉर्मेशन और डाटा, विकास के बहुत बड़े टूल हैं, इन्हे सुरक्षित रखने के लिए हमारी परंपरागत पद्धतियों के साथ-साथ मोड, मेथड और मैकेनिज्म आदि में आमूलचूल परिवर्तन करना पड़ेगा। आने वाले दिनों में इसके लिए आसूचना ब्यूरो को तैयार और टेक्नोलॉजी से लैस करने की रिस्पॉन्सिबिलिटी युवा अफसरों पर होगी। इसके अलावा शाह ने कहा कि पीएम मोदी नेतृत्व में 2027 में हम दुनिया का तीसरे नंबर का अर्थतंत्र बन जाएंगे। जब हम आगे बढ़ते हैं तो स्पर्धा बढ़ती है, खतरे बढ़ते हैं और रोकने वाली ताकतें भी खड़ी होती हैं। इन खतरों का मुकाबला करने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर मुख्यालय से लेकर पुलिस थाने और कांस्‍टेबल तक एक भाव के साथ मजबूती के साथ खड़ा करना युवा अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

पीएम मोदी के विजन के अनुरूप 2047 तक एक पूर्ण विकसित भारत के निर्माण के लिए इन सभी संभावित खतरों को विजुलाइज करना पड़ेगा और देश को इनसे सुरक्षित करने का पूरा रोड मैप भी तैयार करना पड़ेगा। समावेशी विकास और देश में शांति व स्थिरता तभी संभव है जब हम नई विस्तृत व्याख्या के अनुसार अपने काम को एक नया आकार दें, नई तैयारी करें और सजग हो जाएं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 10 साल में आतंकवाद, नक्सलवाद, उग्रवाद, नारकोटिक्स और अराजक तत्वों के खिलाफ बहुत बड़ी सफलताएं प्राप्त हुई हैं। मोदी सरकार ने एजेंसियों के सशक्तिकरण और उनकी शक्ति के विस्तार के लिए कई काम किए हैं और राज्यों तथा एजेंसियों के समन्वय पर भी बहुत फोकस किया गया है।

एजेंसियों को कानून की ताकत मुहैया कराकर अनेक कानूनों में बदलाव कर एजेंसियों के हाथ मजबूत करने का भी काम किया गया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में भारत रीजनल लीडर से ग्लोबल लीडर बनने की यात्रा पूरी कर चुका है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में आउटसाइडर समझा जाने वाला भारत अब खुद न केवल महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन करता है, बल्कि कूटनीति, आर्थिक और सुरक्षा के क्षेत्र की दशा और दिशा निर्धारित करने की शक्ति भी भारत ने प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि इसे बरकरार रखना हमारा जिम्मेदारी है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो के निदेशक, आसूचना ब्यूरो के कई पूर्व निदेशक, केंद्रीय पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के महानिदेशक, आसूचना ब्यूरो और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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