अमेरिकी टैरिफ की मार: पीतल नगरी मुरादाबाद की अर्थव्यवस्था संकट के घेरे में, कारीगरों की नौकरी पर संकट
US Tariff Crisis: अमेरिका द्वारा भारतीय ब्रास-हस्तशिल्प उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद मुरादाबाद की पीतल उद्योग में संकट गहराया है। इस कदम ने शहर की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है और निर्यातक और कारीगरों का भविष्य अब अनिश्चितता में फंसा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार समय पर हस्तक्षेप न करे, तो पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा।
त्योहारी सीजन में भी निर्यात प्रभावित
मूल्य वृद्धि और प्रतिस्पर्धा में गिरावट
निर्यातकों का कहना है कि टैरिफ बढ़ने के कारण अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो गए। वहीं चीन और वियतनाम जैसे देशों के उत्पाद पहले से ही सस्ते हैं, जिससे भारतीय ब्रासवेयर विदेशी खरीदारों की पहली पसंद नहीं रह गया। कई खरीदार कस्टम ड्यूटी बढ़ने का हवाला देते हुए डिलीवरी टाल रहे हैं या कीमत घटाने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
कारीगरों और मजदूरों पर संकट
टैरिफ की मार सबसे ज्यादा स्थानीय कारीगरों पर पड़ी है। कई वर्कशॉप में कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है। जो मजदूर रोजाना दिहाड़ी पर काम करते थे, वे अब अन्य विकल्पों की तलाश में हैं। कई उत्पादन इकाइयां खर्चा पूरा न कर पाने के कारण सीमित दिनों में ही खुल रही हैं।
सरकारी हस्तक्षेप की मांग
निर्यातक और उद्योग संगठन सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता के जरिए अमेरिकी टैरिफ को कम कराया जाए। उनका कहना है कि यदि केंद्र या राज्य सरकार पिछले तीन वर्षों के औसत निर्यात कारोबार का 10 प्रतिशत सम्मान निधि के रूप में उपलब्ध कराए, तो मुरादाबाद की अर्थव्यवस्था को एक नई सांस मिल सकती है।
बाजार तलाश में निर्यातक
निर्यातक अब यूरोप, मध्य एशिया और खाड़ी देशों में अपने उत्पाद बेचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि नए बाजार विकसित होने में समय लगता है। अमेरिकी बाजार जितना बड़ा और लाभदायक है, उसकी बराबरी किसी अन्य बाजार से नहीं की जा सकती।
कारीगर परिवारों की आजीविका पर संकट
अवधेश अग्रवाल, मुख्य संयोजक ईपीसीएच ने बताया कि यह केवल व्यापार का मामला नहीं है, बल्कि पांच लाख से अधिक कारीगर परिवार की आजीविका की लड़ाई है। यदि सरकार समय पर वित्तीय और नीति आधारित सहायता प्रदान नहीं करती, तो मुरादाबाद का पारंपरिक ब्रास उद्योग लंबे समय तक खड़ा नहीं रह पाएगा।
