Thursday, April 11, 2024

शामली में किसानों का साथ दिया तो शुगर मिल ने नौकरी से हटाया,अब गन्ने की खेती छोड़ गाजर की खेती कर पेश की मिसाल

शामली। गन्ना भुगतान की लचर प्रक्रिया का असर अब किसानों पर पड़ने लगा है। जहां किसान गन्ने की परंपरागत खेती छोड़ अब अन्य फसलों की तरफ अक्सर होने लगा है। इसी की एक बानगी जनपद शामली में देखने को मिली है। जहां एक किसान शुगर मिल में नौकरी करता था। लेकिन किसानों के धरने में शामिल होना उसे भारी पड़ गया और शुगर मिल ने उसे नौकरी से निकाल दिया। जिसके बाद किसान का मन आहत हुआ और उसने नौकरी के साथ-साथ गन्ने की फसल भी बोना छोड़ दिया। जिसके चलते अब किसान पिछले 4 वर्षों से गाजर की खेती कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहा है और क्षेत्र के किसानों के लिए एक मिसाल बनकर उभर रहा है।

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आपको बता दें थाना आदर्श मंडी क्षेत्र के गांव कसेरवा कला निवासी कर्मवीर देशवाल खेती किसानी करने वाले किसानों के लिए एक प्रेरणा बनकर उभर रहा है। जहां किसान द्वारा लाल विलायती गाजर की खेती कर गन्ने की फसल से अच्छा मुनाफा कमाया जा रहा है। किसान ने बताया कि उसके यहां तक पहुंचाने का सफर बहुत पीड़ा दायक है। क्योंकि वह शामली शुगर मिल में नौकरी करता था और सन 2019 में गन्ना भुगतान की मांग को लेकर शामली शुगर मिल में किसानों का एक लंबा धरना प्रदर्शन चला था। जिसमें वह अपने किसान भाइयों के साथ धरने पर बैठा तो शुगर मिल के अधिकारियों ने उसे नौकरी से यह कहते हुए हटा दिया कि हमें ऐसे कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं है, जो किसानों का साथ दे।

 

कर्मवीर देशवाल ने बताया कि क्षेत्र में लगातार गन्ना किसानों की गन्ना भुगतान को लेकर बुरी दुर्दशा को देखकर गन्ने की खेती से उसका मोह भंग हो गया। क्योंकि शामली शुगर मिल पर अभी भी पिछले सीजन का 214 करोड़ रुपए का बकाया गन्ना भुगतान बाकी है। जिसके बाद उसके शुभचिंतक द्वारा उसे विलायती गाजर की खेती करने के लिए प्रेरित किया गया। जिसके बाद से ही किसान पिछले तीन-चार वर्षो से खेत में प्लांट लगाकर आधुनिक तरीके से लाल विलायती गाजर की खेती कर रहा है।

 

किसान ने बताया कि उसके द्वारा सैकड़ो बीघा जमीन में विदेशी टेक्नोलॉजी से गाजर की आधुनिक खेती की जा रही है। जिस बीज को वह बौ रहा है। वह भी विदेश से ही मंगवाया जाता है। किसान ने कहा कि गाजर की खेती से वह गन्ने से बहुत अच्छा और नगद मुनाफा कमा रहा है. साथ ही खेत में काम करने वाले दर्जनों मजदूरों को भी समय से मजदूरी दे रहा है। किसान ने बताया कि बीते 4 वर्षों में उसकी गाजर के डिमांड बढ़ी है, और अपनी गाजर को दिल्ली, पानीपत, करनाल, सहारनपुर मेरठ, बागपत, शामली आदि मंडियों में अच्छे मूल्य पर बेच रहा है।

 

वहीं मौजूदा समय में गन्ना किसानों की बुरी दुर्दशा देखते हुए किसान ने उन्हें संदेश देते हुए कहा कि गन्ने का भुगतान अक्सर समय पर नहीं मिल पाता है। जिससे किसानों को आने को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में किसानों को गन्ने की जगह अन्य फसलों तिलहन, दलहन आदि फसलों को बौना शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि ऐसी फसलों को किसान अपने निर्धारित मूल्य पर नगद और मुनाफे से बेच सकता है। किसान ने कहा कि वह मौजूदा समय में गाजर की खेती से बहुत खुश है और उसके दोनों बेटे भी गाजर की खेती में उसका हाथ बटाते हैं।

 

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