Tuesday, February 20, 2024

मुजफ्फरनगर में अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय प्रथम ने पति को दिया ये आदेश

मुज़फ्फरनगर। नई मंडी कोतवाली थाना क्षेत्र के मंडी निवासी योगेश कुमार जैन की पुत्री नेहा जैन का विवाह सहारनपुर के प्रसिद्ध इनकम टैक्स अधिवक्ता श्रेयांस कुमार जैन के पौत्र व वरिष्ठ अधिवक्ता इनकम टैक्स राजीव कुमार जैन के पुत्र सिद्धार्थ जैन के साथ वर्ष 2011 में बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ था शादी के कुछ समय बाद ही पति-पत्नी में विवाद उत्पन्न हो गया जिसके चलते आपस में मुकदमे शुरू हो गए।

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नेहा जैन की ओर से दहेज आदि के मुकदमों के अलावा अपना व अपनी नाबालिग पुत्री के भरण पोषण के लिए वाद 125 सीआरपीसी परिवार न्यायालय में दायर किया हुआ था, जो अपर न्यायाधीश परिवार न्यायालय प्रथम के यहां काफी समय से लंबित था, जिसमे सिद्धार्थ जैन ने अपनी इनकम छुपाने का भरसक प्रयास किया इसी बीच सुप्रीमकोर्ट के द्वारा भरण पोषण मामलों में विधि व्यवस्था रजनीश बनाम नेहा में गाइडलाइन पूरे भारत मे जारी की, जो सभी परिवार न्यायालय के लिए लागू हुई तथा साथ साथ पति व पत्नी को भी इस गाइडलाइन के अनुपालन में अपनी इनकम की जानकारी के लिए इनकम टैक्स रिटर्न्स, बैंक स्टेटमेंट, सम्पत्ति, के सम्बंध में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए तथा गाइडलाइन में यह भी आदेश जारी किए गए थे कि जानकारी गलत पाए जाने पर कार्यवाही भी की जाएगी।

 

 

नेहा जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार जैन व विपक्षी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज कुमार शर्मा ने पैरवी की, परन्तु नेहा जैन के वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार जैन की जबरदस्त पैरवी के चलते विपक्षी सिद्धार्थ जैन की सारी इनकम की जानकारी न्यायालय के समक्ष आ गयी। अपर न्यायाधीश परिवार न्यायालय के न्यायाधीश रामनेत के द्वारा दोनों पक्षो की दलील सुनने के उपरांत निर्णय हेतु 8 फरवरी नियत कर दी थी ।

 

 

8 फरवरी को न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाते हुए विपक्षी पति सिद्धार्थ जैन को आदेश किया कि वह अपनी पत्नी नेहा जैन व अपनी नाबालिग पुत्री आरना जैन को उसके बालिग होने तक कुल 73000/- रुपये प्रतिमाह भरण पोषण वाद दायर करने की तिथि से अदा करे।

 

 

इतनी राशि का भरण पोषण का आदेश जनपद मुज़फ्फरनगर में पहली बार हुआ है कि इतनी राशि का आदेश आज तक किसी मुकदमे ने नही हुआ है, क्योंकि भरण पोषण मामले में पति अपनी आय को छुपाने के लिए हर हथकंडे अपनाते है, ताकि भरण पोषण की राशि कम से कम अदा करनी पड़े परन्तु इस मामले में नेहा जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार जैन ने कड़ी महनत करके नेहा जैन को न्याय दिलाया।

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