भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसरः उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
नई दिल्ली। राज्यसभा का 270वां सत्र प्रारंभ हो चुका है और इस सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें आयोजित की जाएंगी। यह संसद का बजट सत्र है। इस दौरान सदन में केंद्रीय बजट 2026-27 तथा सरकार के विधायी प्रस्तावों पर गहन चर्चा की जाएगी।
इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक चर्चा की अपेक्षा की गई है। सभापति का कहना है कि विधायी कार्यों की व्यापकता हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करती है कि सदन के निर्धारित समय का अधिकतम और रचनात्मक उपयोग किया जाए। ऐसा करके जनता की आकांक्षाओं को साकार किया जा सकता है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने संसद के बजट सत्र के अंतर्गत राज्यसभा के 270वें सत्र में सभी सदस्यों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत शीघ्र ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव के बीच संसद सदस्यों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि राष्ट्र की आर्थिक दिशा तय करने में संसद की भूमिका केंद्रीय है। उन्होंने राष्ट्रपति के संसद के दोनों सदनों को संबोधित भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। इसके अनुरूप राज्यसभा भी अपने विधायी और विचार-विमर्श संबंधी दायित्वों के माध्यम से योगदान देगी।
राधाकृष्णन ने जानकारी दी कि इस सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें केंद्रीय बजट 2026-27 तथा सरकार के विधायी प्रस्तावों पर गहन चर्चा की जाएगी। उन्होंने सभी सांसदों से सशक्त संसदीय निगरानी सुनिश्चित करने और उच्चतम संसदीय मर्यादा, अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र विभिन्न विचारों और जीवंत बहस से सुदृढ़ होता है, किंतु मतभेदों की अभिव्यक्ति सम्मानजनक और रचनात्मक होनी चाहिए। यह सत्र शालीनता, अनुशासन और गरिमापूर्ण आचरण का उदाहरण बने, उन्होंने ऐसी अपेक्षा व्यक्त की। महात्मा गांधी के विचारों का उद्धरण देते हुए उन्होंने आगे कहा कि अनुशासित और प्रबुद्ध लोकतंत्र संसार की सर्वोत्तम व्यवस्था है।” उन्होंने कहा कि सदन में सदस्यों का आचरण इसी अनुशासन और प्रबुद्धता को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
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