गुरुग्राम में लापरवाही पर गिरी गाज, जलभराव के दौरान ड्यूटी से गायब रहने पर जेई मनोज निलंबित
शुक्रवार की बारिश के दौरान वार्ड-14 में अनुपस्थित मिले जूनियर इंजीनियर मनोज, फोन भी मिला बंद
गुरुग्राम में शुक्रवार को हुई बारिश और जलभराव के दौरान वार्ड-14 में ड्यूटी से नदारद रहने तथा फोन बंद मिलने पर जूनियर इंजीनियर मनोज को निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनका मुख्यालय अब सोहना नगर परिषद का कार्यालय तय किया गया है।
गुरुग्राम: शहर में हाल ही में हुई बारिश के बाद उत्पन्न हुई गंभीर जलभराव की स्थिति के दौरान अपने काम में कथित तौर पर लापरवाही बरतने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में नगर निगम गुरुग्राम के जूनियर इंजीनियर मनोज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई वार्ड नंबर-14 में जलभराव के हालात के समय फील्ड से गैरहाजिर रहने और मोबाइल फोन बंद पाए जाने के कारण निगमायुक्त द्वारा की गई है।
वार्ड-14 में थी तैनाती
प्राप्त जानकारी के अनुसार जूनियर इंजीनियर मनोज की ड्यूटी वार्ड-14 में लगाई गई थी। उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वे इलाके में जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखें। इसके साथ ही उन्हें यह भी सुनिश्चित करना था कि जरूरत के समय आवश्यक मशीनरी, कर्मचारी और डी-वाटरिंग की व्यवस्था समय पर मौके पर तैनात कर दी जाए। लेकिन शुक्रवार को हुई बारिश के दौरान जब शहर पानी से जूझ रहा था, तब वे अपनी ड्यूटी की जगह से पूरी तरह नदारद पाए गए।फोन बंद और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ा
निगमायुक्त प्रदीप दहिया द्वारा जारी किए गए आदेश में यह बात कही गई है कि बारिश और जलभराव के संकट के समय जूनियर इंजीनियर मनोज का मोबाइल फोन बंद आ रहा था। इस वजह से उनसे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया या मदद नहीं मिल सकी। इसके अलावा जांच में यह बात भी सामने आई कि उन्होंने बिना किसी पूर्व अनुमति के अपना मुख्यालय और स्टेशन छोड़ दिया था। प्रशासन ने इसे आपात स्थिति के दौरान समय पर जरूरी कदम उठाने में रुकावट डालने वाला एक बहुत ही गंभीर मामला माना है।
सोहना नगर परिषद भेजा गया मुख्यालय
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने विभागीय कार्यवाही के लंबित रहने तक जूनियर इंजीनियर मनोज को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। निलंबन की इस अवधि के दौरान उनका नया मुख्यालय नगर परिषद सोहना के कार्यकारी अधिकारी का कार्यालय तय किया गया है। उन्हें यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना देरी किए तुरंत वहां जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। निगमायुक्त की ओर से यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि आपातकाल के हालातों में काम के प्रति किसी भी तरह की कोताही या लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी अधिकारियों तथा कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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