निशु आजाद केस: आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को 1 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड, पूछताछ में खुलेंगे कई राज
नई दिल्ली। निशु आजाद केस में खुद को इन्फ्लुएंसर बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर शनिवार को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। भारद्वाज ने दावा किया था कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उसने एक छात्र प्रदर्शनकारी के पिता से मारपीट की थी। पुलिस ने भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट के जज के घर पर पेश किया। इसके बाद कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
ये भी पढ़ें दिल्ली-NCR में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, 3-4 सितंबर को बारिश के आसार; गर्मी-उमस से मिलेगी राहतमएक दिन पहले, दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हिरासत में लिया था। शुक्रवार को नई दिल्ली में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने भरोसा दिलाया था कि वे आरोपी को पॉक्सो एक्ट, एससी/एसटी एक्ट और हत्या की कोशिश की धाराओं के तहत 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार करेंगे। सीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन में सांसद चंद्रशेखर, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव और इंडियन यूथ कांग्रेस भी शामिल हुए।
एक वायरल वीडियो में भारद्वाज के यह दावा करने के बाद विवाद खड़ा हो गया कि उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग प्रदर्शनकारी निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट की थी और डींग मारी थी कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया क्योंकि उनके राजनीतिक संबंध हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कड़ी धाराओं में एफआईआर दर्ज करने और आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की थी। इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को दावा किया कि वायरल वीडियो में आरोपी ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज नाम के आरोपी के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है और वे नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाना सुनिश्चित करेंगे।
पटना में मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए और इसलिए कि उस व्यक्ति ने कई राजनेताओं के नामों के साथ-साथ मेरे नाम का भी गलत इस्तेमाल किया है, मैंने उसके खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही, मैंने दिल्ली पुलिस से आग्रह किया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके अलावा पासवान ने कहा कि मैं और मेरी पार्टी उन्हें न्याय दिलाने की जिम्मेदारी लेते हैं, क्योंकि मुझ पर आरोप लगाए गए हैं कि शायद मेरे और अन्य राजनेताओं के समर्थन के कारण आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए अब हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सच्चाई सामने आए और उस आरोपी को कड़ी सजा मिले जो खुलेआम कानून व्यवस्था का मजाक उड़ा रहा था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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