Sunday, April 6, 2025

मुज़फ्फरनगर- मतदान के बाद प्रत्याशियों ने ली राहत की सांस, मीनाक्षी-लवली-रोशनजहां ने परिवार के साथ बिताया समय

मुजफ्फरनगर। नगर पालिका चुनाव की मतदान प्रक्रिया सम्पन्न होने के पश्चात प्रत्याशियों व उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली है। मतदान का अगला पूरा दिन प्रत्याशियों ने अपने परिवार के साथ बिताया और लगातार 15 दिन तक चुनाव प्रचार कर हुई थकान के बाद घर पर रहकर आराम किया। इस दौरान प्रत्याशियों के समर्थक उनसे मिलने आते रहे और हार-जीत के आंकड़े भी बताते रहे।

मुजफ्फरनगर नगरपालिका से अध्यक्ष पद की भाजपा प्रत्याशी श्रीमती मीनाक्षी स्वरूप ने शुक्रवार का दिन अपने परिवार के साथ बिताया। पिछले लगभग 15 दिन से दिन-रात चुनाव प्रचार में जुटी रही मीनाक्षी स्वरूप व उनके पति गौरव स्वरूप ने घर पर रहकर आराम किया और अपने दोनों पुत्रों व परिवार के साथ चुनाव को लेकर चर्चा की। गौरव स्वरूप के पटेलनगर स्थित आवास पर सुबह से ही समर्थकों का आना-जाना लगा रहा और मतदान को लेकर चर्चा होती रही।

सभी प्रत्याशियों के समर्थक अपनी-अपनी जीत का दावा ठोक रहे हैं, लेकिन आने वाली 13 तारीख को सभी को बेसब्री से इंतजार है, क्येांकि इसी दिन प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। 13 तारीख को ही तय होगा कि किसके सिर पर जीत का ताज बंधे और कौन मायूस होकर अपने घर को लौटेगा, लेकिन मतदान होने के बाद सभी प्रत्याशी अपने परिवार के साथ प्रसन्नमुद्रा में नजर आये।

सपा गठबंधन प्रत्याशी लवली शर्मा ने भी चुनाव प्रचार के दौरान खूब मेहनत की और हर गली, मौहल्ले में घर-घर जाकर वोट मांगे। मतदान सम्पन्न होने के बाद देर रात तक चुनाव को लेकर चर्चा हुई और अगली सुबह लवली शर्मा व उनके पति राकेश शर्मा ने मंदिर में जाकर पूजापाठ की। इसके बाद घर पर परिवार के साथ समय बिताया। राकेश शर्मा के अंकित विहार स्थित आवास पर पूरा दिन समर्थक पहुंचते रहे और चुनाव को लेकर चर्चा हुई। सपा प्रत्याशी के समर्थकों मे भी अच्छा-खासा उत्साह दिखाई दे रहा है और वह भी भाजपा प्रत्याशी के समर्थकों की तरह ही जीत के दावे कर रहे और उंगलियों पर गिनकर आंकड़े फिट कर रहे हैं।

बसपा प्रत्याशी रोशन जहां ने हालांकि चुनाव प्रचार नाममात्र का किया है और उनके पति इंतजार त्यागी भी एक निश्चित दायरे में चुनाव प्रचार करते रहे। बसपा प्रत्याशी ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में ही चुनाव प्रचार किया और मंडी, गांधी कालोनी जैसे क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करने के लिये नहीं आये, लेकिन मतदान के बाद वह भी अपनी जीत का दावा करते हुए नजर आये। उनके समर्थक भी अपने हिसाब से आंकड़े सेट कर किसको कितनी वोट मिल रही है, इस पर चर्चा करते रहे।

इन चुनाव में सबसे बुरा हाल कांग्रेस का रहा। लगातार दो बार नगर पालिका चेयरमैन का चुनाव जीती कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी बिलकिस चौधरी ने बिल्कुल भी चुनाव प्रचार नहीं किया और मात्र एक गाड़ी के साथ निश्चित स्थानों पर जाकर चुनाव प्रचार की रस्म अदायगी की। नगर पालिका चुनाव में वर्ष 2012 व 2017 में लगातार चेयरमैनी जीतने वाली कांग्रेस हाईकमान ने इस बार बेहद कमजोर प्रत्याशी मैदान में उतारा।

2012 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय अग्रवाल को कांग्रेस प्रत्याशी पंकज अग्रवाल ने 4200 वोटों से हराया था और इसके बाद 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा को कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल ने 12250 वोटों से हरा दिया था। दो बार के चुनाव में इतना शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी इस बार कांग्रेस ने चुनाव लड़ने की केवल रस्म अदायगी की। इन चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा-सपा प्रत्याशी के बीच ही सिमट कर रह गया है। कुछ जगह बसपा प्रत्याशी भी अपनी उपस्थित दर्ज करने के प्रयास में है।

भाजपा व सपा प्रत्याशी के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है और दोनों के समर्थक ही जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि, कम मतदान प्रतिशत दोनों प्रत्याशियों व उनके समर्थकों की चिंता बढ़ाने का काम कर रहा है। इस बार जनपद में मुजफ्फरनगर नगर पालिका में सबसे कम 50.19 प्रतिशत वोट पड़े, जो पिछली बार के मुकाबले लगभग 6 प्रतिशत कम हैं।

सबसे ज्यादा बुढ़ाना नगर पंचायत में वोटिंग हुई है। मुजफ्फरनगर नगर पालिका क्षेत्र में सबसे कम मतदान मदनमोहन मालवीय इंटर कालेज के कक्ष संख्या पांच में 10.18 प्रतिशत हुआ, जबकि सबसे ज्यादा वोट प्राथमिक विद्यालय वहलना के कक्ष संख्या एक में 75.23 प्रतिशत वोट पड़े। हिन्दू-मुस्लिम दोनों ही समुदायों के मतदाताओं में कोई खासा उत्साह देखने को नहीं मिला। इस बार मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भी वोट प्रतिशत उतना नहीं रहा, जितनी उम्मीद थी। ऐसे ही हालात हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों में भी रहे और बेहद कम मतदान हुआ।

दोनों ही क्षेत्रों में वोट प्रतिशत कम रहने के कारण प्रत्याशी व उनके समर्थक टेंशन में है और केवल आंकडों से ही हार-जीत तय करने में जुटे हुए है। अब लगातार 13 मई तक यही चलता रहेगा और प्रत्याशियों के घरों पर पहुंचकर उनके समर्थक अपने-अपने हिसाब से हार-जीत के आंकडे पेश करते रहेंगे, लेकिन असली तस्वीर तो आने वाली 13 मई को ही मतगणना के पश्चात सामने आ पायेगी, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है।

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