श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक वहीद पारा ने बुधवार को केंद्र शासित प्रदेश में जारी खनन गतिविधियों और बड़े पैमाने पर विकास कार्यों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि खनन माफिया के बढ़ते प्रभाव और अंधाधुंध विकास कार्यों के कारण जम्मू-कश्मीर, विशेष रूप से कश्मीर घाटी, गंभीर पर्यावरणीय संकट की ओर बढ़ रही है।
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वहीद पारा ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर में खनन गतिविधियों में एक बड़ा माफिया शामिल है। खनन और बड़े पैमाने पर विकास कार्यों के कारण कश्मीर क्षेत्र, जो एक नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र है, पारिस्थितिक विनाश का शिकार हो रहा है।” उन्होंने इस संबंध में पर्यावरण मंत्री से सभी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव पर स्पष्टीकरण मांगा है।
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उन्होंने अमरनाथ यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यदि पर्यावरण को सुरक्षित नहीं रखा गया, तो भविष्य में इस धार्मिक यात्रा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। “अमरनाथ यात्रा तभी होगी जब पर्यावरण संरक्षित होगा,” उन्होंने कहा।
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इस बीच, जम्मू-कश्मीर के विपक्ष के नेता (एलओपी) और भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान बजट में आम जनता की समस्याओं को अनदेखा किया गया है।
सुनील शर्मा ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर के नागरिक बजट सत्र का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। लोगों को उम्मीद थी कि सरकार इस बजट सत्र में उनकी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करेगी, लेकिन अब तक जो देखा गया है, उससे यही लगता है कि सरकार जनता के मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल कश्मीर के मतदाताओं को पाकिस्तान का मुद्दा उठाकर प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब जनता इन सब से जागरूक हो चुकी है और इस राजनीति को खारिज कर चुकी है।
वहीद पारा के इस बयान के बाद जम्मू-कश्मीर में खनन गतिविधियों और बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण कार्यों के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है। पर्यावरणविदों का भी मानना है कि यदि अवैध खनन और अनियंत्रित विकास कार्यों पर जल्द ही रोक नहीं लगाई गई, तो इससे घाटी का पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।