Sunday, June 23, 2024

यूके से सोना वापस लाने पर मोदी सरकार की सोशल मीडिया पर लोग कर रहे सराहना, पहले की सरकारों को दे रहे उलाहना

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्रिटेन से 1,00,000 किलो सोना वापस मंगाया है। यह सोना भंडार में ट्रांसफर किया गया है। अब भारत इतना ही और सोना विदेश से वापस लाने की तैयारी में है। रिजर्व बैंक और सरकार के इस कदम की सोशल मीडिया पर खूब सराहना हो रही है। लोग सोशल मीडिया पर यह तक लिख रहे हैं कि जो काम देश की पहले की सरकारें नहीं कर पाई, वह काम नरेंद्र मोदी की सरकार ने कर दिखाया।

 

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देश की इस उपलब्धि और सरकार के प्रयासों की जमकर सराहना की जा रही है। लोग लिख रहे हैं कि पूरा देश चुनाव में व्यस्त है, इस बीच आरबीआई ने अपना 100 टन सोने का भंडार ब्रिटेन से भारत वापस स्थानांतरित कर दिया है। अधिकांश देश अपना सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड या ऐसे किसी स्थान पर सुरक्षित रखते हैं और इसके लिए शुल्क का भुगतान करते हैं। इसके साथ ही लोग लिख रहे हैं कि भारत अब अपना अधिकांश सोना अपनी तिजोरियों में रखेगा। 1991 में जब हमें संकट के समय में अपना सोना रातों-रात विदेश भेजना पड़ा था, तब से हम एक लंबा सफर तय कर चुके हैं।

 

 

लोग सोशल मीडिया पर यह भी लिख रहे हैं कि आरबीआई का गोल्ड रिजर्व 2014 में 557 टन था, जो 2024 में 822 टन हो गया है। यानी 10 साल के पीएम मोदी के शासनकाल में देश के गोल्ड रिजर्व में 53% की वृद्धि हुई है। साथ ही लोग लिख रहे हैं कि मोदी सरकार ने 265 टन सोना इस दौरान खरीदा है। वहीं, लोग प्रतिक्रिया देते हुए यह भी लिख रहे हैं कि कभी देश की अर्थव्यवस्था को ठीक रखने के लिए सरकारें सोना गिरवी रखती थी, अब देश के अपने ही भंडार में सोना शिफ्ट हो रहा है। बता दें कि देश में 100 टन सोना वापस लाने के साथ ही आरबीआई ने एक और बड़ा फैसला यह भी लिया है कि अब रिजर्व गोल्ड की बड़ी मात्रा को देश के अंदर ही रखा जाएगा। विदेशों में रखा सोना भी भारत लाया जाएगा। 100 टन सोना जो भारत लाया गया है, वह बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया था।

 

 

ज्यादातर देश लंदन में ही सोना रिजर्व में रखते हैं। ऐसे में एक विशेष विमान के जरिए 100 टन सोना लंदन से भारत लाया गया। आरबीआई के आधे से अधिक गोल्‍ड भंडार विदेश में बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास सुरक्षित रखे गए हैं। 1991 में चंद्रशेखर सरकार ने गोल्‍ड को गिरवी रखा था। फिर, 4 से 18 जुलाई 1991 के बीच आरबीआई ने 400 मिलियन डॉलर जुटाने के लिए बैंक ऑफ इंग्‍लैंड और बैंक ऑफ जापान के पास 46.91 टन सोना गिरवी रखा था। यानी 1991 में आर्थिक संकट से निपटने के मकसद से नरसिम्हा राव की सरकार ने इतनी बड़ी मात्रा में सोना गिरवी रखा था।

 

 

2009 में मनमोहन सिंह की सरकार ने आईएमएफ (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) से 6.7 अरब डॉलर की कीमत पर 200 टन सोने की खरीदी की थी। हाल के वर्षों में आरबीआई के द्वारा खरीदे गए सोने के स्टॉक में लगातार वृद्धि होती रही। आरबीआई के पास कुल सोना 822 टन है। जिसमें से आरबीआई के पास 100 टन सोना है, नोट छापने के लिए रिजर्व सोना 308 टन है और 414 टन सोना विदेशों में रखा गया है। हाल के वर्षों में आरबीआई का भरोसा गोल्ड पर बढ़ा है। 2022-23 में आरबीआई ने 34.3 टन गोल्ड की खरीदी की। जबकि, 2023-24 में 27.7 टन सोने की खरीदी की गई। दुनिया के सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व वाले देशों की सूची देखें तो इसमें अमेरिका के पास सबसे ज्यादा 8,134 टन, जर्मनी के पास 3,352 टन, इटली के पास 2,452 टन, फ्रांस के पास 2,437 टन, रूस के पास 2,333 टन और भारत के पास 822 टन सोना रिजर्व में है। यानी दुनिया में भारत का गोल्ड रिजर्व रखने वाले देशों की सूची में स्थान नौवां है।

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