Thursday, May 30, 2024

समाज के दुश्मन हैं ड्रग माफिया, पूरे नेटवर्क का हो खात्मा : मुख्यमंत्री

मुज़फ्फर नगर लोकसभा सीट से आप किसे सांसद चुनना चाहते हैं |

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को एनकॉर्ड राज्य स्तरीय समिति की बैठक हुई। बैठक में भारत सरकार व राज्य सरकार के अनेक अधिकारी शामिल हुए। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने ड्रग माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ड्रग का अवैध कारोबार करने वालों की कुर्की की जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी की समस्या किसी एक राज्य की समस्या नहीं है। यह एक व्यापक समस्या है। इससे निपटने के प्रयास भी एकीकृत होने चाहिए। प्रवर्तन से जुड़े सभी बल एकजुट होकर इस दिशा में कार्रवाई करें। हमें ड्रग्स के सोर्स की पड़ताल, उसके नेटवर्क की समाप्ति, दोषियों की गिरफ्तारी और नशा करने वालों के पुनर्वास के बहुआयामी प्रयास करने होंगे।

Royal Bulletin के साथ जुड़ने के लिए अभी Like, Follow और Subscribe करें |

 

प्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध निर्माण, खरीद-फ़रोख़्त और ड्रग ट्रैफिकिंग के विरुद्ध अभियान को और तेज करने की आवश्यकता है। पुख्ता इंटेलिजेंस इकट्ठा करें, बेहतर कार्ययोजना तैयार करें और फिर पूरी तैयारी के साथ बड़ी कार्रवाई करें। जो भी व्यक्ति ऐसे असामाजिक कार्य में संलिप्त पाए जाएं, उनके खिलाफ कुर्की सहित कठोरतम कार्रवाई की जाए। ड्रग माफिया के पूरे नेटवर्क के खात्मा किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि संवेदनशील जिलों में सतर्कता और इंटेलिजेंस को और बेहतर करना होगा। अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौकसी बढ़ाई जाए। गृह विभाग के साथ-साथ नगर विकास व ग्राम्य विकास विभाग को भी इस अभियान में सहयोग करना होगा। बेहतर समन्वय के साथ ड्रग माफिया के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, भारत सरकार (एनसीबी) ने गोरखपुर में नया ज़ोन मुख्यालय बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मुख्यालय के भवन के लिए आवश्यक भूमि आदि संसाधनों की उपलब्धता कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एनसीबी का यह प्रयास प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार की समाप्ति में हमारा बड़ा सहयोगी होगा।

ड्रग ट्रैफिकिंग के अवैध कारोबार में संलिप्त लोग समाज के दुश्मन हैं। यह मानवता के अपराधी हैं। ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। एनडीपीएस के मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जानी जरूरी है, ताकि अपराधियों को शीघ्र सजा मिले। एनडीपीएस अधिनियम के तहत सर्वाधिक लंबित मुक़दमों वाले जिलों में विशेष न्यायालय का गठन किया जाना चाहिए। इस संबंध में शासन स्तर से आवश्यक कार्रवाई की जाए।

प्रदेश में ड्रग ट्रैफिकिंग के विरुद्ध सुनियोजित और प्रभावी कार्रवाई के लिए विगत वर्ष महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने अगस्त 2022 में ‘एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ का गठन किया था। एएनटीएफ के पास सर्च, जब्ती, गिरफ्तारी, कुर्की, अभिरक्षा, विवेचना जैसे सभी जरूरी अधिकार हैं। यह हर्ष का विषय है कि एएनटीएफ प्रमुखों के राष्ट्रीय सम्मेलन में उत्तर प्रदेश की व्यवस्था को आदर्श मानकर इसे अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय माना गया। एएनटीएफ की आवश्यकता के अनुरूप सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

एएनटीएफ में अवस्थापना सुविधाओं को विस्तार देते हुए वर्तमान में गोरखपुर, मेरठ और बाराबंकी में एएनटीएफ थाने स्थापित किए गए हैं। जबकि पांच ऑपरेशनल यूनिट क्रियाशील हैं। अब अगले चरण में झांसी, सहारनपुर और गाजीपुर में भी थाने क्रियाशील किए जाएं।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मादक पदार्थों के अवैध क्रय, विक्रय, उपयोग आदि पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। वर्ष 2020 में 11400 से अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी हुई, जबकि वर्ष 2021 और 2022 में क्रमशः 11749 और 11595 लोगों की गिरफ्तारी हुई। अकेले एएनटीएफ द्वारा 26 मामलों में 64 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, जबकि 27 करोड़ 43 लाख के अवैध मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं।

भारत सरकार की मंशा के अनुरूप जिला-स्तरीय और राज्य-स्तरीय एनकॉर्ड की बैठकें नियमित अन्तराल पर की जाएं। प्रमुख सचिव गृह और स्पेशल डीजी कानून-व्यवस्था इन जिलों की समीक्षा करें।

उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई सिर्फ किसी एक सरकार की लड़ाई नहीं जन-जन की लड़ाई है। नशे के खिलाफ लड़ाई को जन आंदोलन बनाना होगा। इस वर्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती (25 सितम्बर) से महात्मा गांधी की जयंती (02 अक्टूबर) तक नशा मुक्ति विषयक प्रदेशव्यापी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी करें।

शिक्षण संस्थानों में नशा मुक्ति के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए और बेहतर कार्य किया जाना चाहिए। नशा छोड़ चुके लोगों के अनुभवों के वीडियो प्रसारित किए जाएं। उच्च शिक्षण संस्थानों में जागरूकता सामग्री का वितरण कराया जाए। कॉन्फ्रेंस के आयोजन भी होने चाहिए। अवकाश के दिनों में शिक्षकों का प्रशिक्षण भी कराया जाए।

Related Articles

STAY CONNECTED

74,188FansLike
5,319FollowersFollow
51,845SubscribersSubscribe

ताज़ा समाचार

सर्वाधिक लोकप्रिय