निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, कहा- गीदड़ भभकियों से नहीं डरूंगा
उत्तर प्रदेश में निलंबित PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री और सरकार के बीच चल रहा गतिरोध अब और गहरा गया है। एक तरफ शासन ने उन्हें 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी कर सख्त रुख अपनाया है, वहीं दूसरी ओर अग्निहोत्री ने सरकार पर समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए इसे "गीदड़ भभकी" करार दिया है।
अलंकार अग्निहोत्री का तीखा हमला
शासन की कार्रवाई: 'कारण बताओ नोटिस'
उत्तर प्रदेश शासन ने उनके हालिया बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को 'अनुशासनहीनता' (Indiscipline) माना है। निलंबित पीसीएस अधिकारी को विधिवत 'कारण बताओ नोटिस' भेजा गया है, जिसमें उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ सेवा नियमावली के उल्लंघन के तहत बर्खास्तगी की कार्रवाई क्यों न की जाए। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए एक निश्चित समय दिया गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो विभागीय जांच (Departmental Inquiry) को और कड़ा किया जा सकता है।उन पर सरकारी पद पर रहते हुए राजनीतिक बयानबाजी करने और सेवा शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप है।
विवाद की जड़ क्या है?
अलंकार अग्निहोत्री का विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर प्रशासनिक निर्णयों और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इसके बाद उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया था, लेकिन निलंबन के बाद उनके तेवर और भी कड़े हो गए हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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