पटना नीट अभ्यर्थी मौत केस: सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की टाइमलाइन में विरोधाभास
पटना। बिहार की राजधानी पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ कथित रेप और मौत के मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल से मिले सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद एक नया मोड़ आ गया है। इस फुटेज ने पुलिस की शुरुआती टाइमलाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और जांच के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं।
बताया जा रहा है कि 10 मिनट 54 सेकंड के सीसीटीवी क्लिप में एक आदमी बेहोश छात्रा को हॉस्टल से बाहर ले जाते हुए दिख रहा है, जबकि परिसर के अंदर अफरा-तफरी का माहौल है। कई महिला छात्राएं दौड़ती हुई, गलियारों में झांकती हुई और घबराहट में प्रतिक्रिया करती हुई दिख रही हैं, जो उस समय भ्रम और जल्दबाजी का संकेत देता है। सूत्रों ने बताया कि यह फुटेज तब रिकॉर्ड किया गया था जब छात्रा को अस्पताल ले जाया जा रहा था। जहानाबाद जिले की रहने वाली छात्रा पटना के चित्रगुप्तनगर इलाके में शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा की तैयारी कर रही थी। वह अपने कमरे में बेहोश मिली और उसे एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद, पीड़िता के परिवार ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। हालांकि, स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) रोशनी कुमारी और पटना के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस कार्तिकेय शर्मा सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने शुरू में पक्के सबूतों की कमी का हवाला देते हुए रेप की बात से इनकार कर दिया था।
अब सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस के बयान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबकि पुलिस ने पहले कहा था कि छात्रा को 6 जनवरी को दोपहर करीब 2 बजे अस्पताल ले जाया गया था, फुटेज में कथित तौर पर कमरे के बाहर गतिविधि शाम 3.50 बजे शुरू होती दिख रही है। हॉस्टल का गेट 3.58.55 बजे खुलता हुआ दिख रहा है, और छात्रा को 4.01.30 बजे बेहोशी की हालत में बाहर ले जाया जा रहा है। आधिकारिक टाइमलाइन और विजुअल सबूतों के बीच लगभग दो घंटे का यह साफ अंतर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। फुटेज ने पुलिस के इस पहले के दावे का भी खंडन किया है कि हॉस्टल के कमरे का दरवाजा तोड़ना पड़ा था। इसके बजाय, इसमें कथित तौर पर एक लड़की को एक मेज पर चढ़कर ऊपर से दरवाजा खोलते हुए दिखाया गया है, जिससे पता चलता है कि जबरन अंदर घुसने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। इससे इस बात पर और सवाल उठते हैं कि क्या कमरा अंदर से बंद था या बाहर से, क्या दूसरों को लॉकिंग सिस्टम के बारे में पता था, और क्या रात 9.30 बजे के बीच किसी ने कमरे में प्रवेश किया था।
5 जनवरी और 6 जनवरी को शाम 4 बजे। दरवाजे के कुंडी, लॉकिंग सिस्टम या हैंडल की ऊंचाई की कोई फोरेंसिक जांच अब तक नहीं बताई गई है। पुलिस के रिस्पॉन्स में देरी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एसएचओ रोशनी कुमारी कथित तौर पर घटना के तीन दिन बाद हॉस्टल गईं, तब तक क्राइम सीन के साथ छेड़छाड़ हो चुकी होगी। आरोप है कि कमरा सील नहीं किया गया था, कोई एंट्री लॉग नहीं रखा गया था और पीड़िता के कपड़े - यौन उत्पीड़न के मामलों में अहम सबूत - तुरंत जब्त नहीं किए गए थे। यह भी आरोप लगाया गया है कि पहले दिन एसएचओ के घटनास्थल पर जाने के बजाय, एक ड्राइवर को भेजा गया था। आगे की चिंताएं प्रभात अस्पताल की रिपोर्ट पर पुलिस की निर्भरता, पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) में तुरंत इलाज की कमी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले ही नींद की गोलियों से जुड़ी थ्योरी सामने रखने से संबंधित हैं। मेडिकल जांच के तरीके पर सवाल उठने के बाद मामला बाद में एम्स को ट्रांसफर कर दिया गया था। सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर दिखाया गया है कि कमरा खुलने के बाद कई लोग अंदर आए - कुछ पानी और कंबल लाए, जबकि कुछ निर्देश देते हुए दिखे।
छात्र के बेहोश होने के बावजूद फुटेज में पुलिस या एम्बुलेंस को तुरंत कॉल करते हुए कोई नहीं दिख रहा है। अब एक अहम सबूत, सीसीटीवी क्लिप, एक खामोश गवाह के तौर पर देखा जा रहा है जो न सिर्फ व्यक्तिगत कामों बल्कि जांच की विश्वसनीयता को भी चुनौती देता है। इस मामले में जैसे-जैसे कार्रवाई जारी है, फुटेज ने जवाबदेही, पारदर्शिता और एक स्वतंत्र, वैज्ञानिक जांच की मांगों को और बढ़ा दिया है। लोगों का ध्यान इस बात पर टिका हुआ है कि विजुअल्स से उठे कई सवालों का निर्णायक रूप से जवाब दिया जाएगा या नहीं। --आईएएनएस पीएसके
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

टिप्पणियां