बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को मिला ग्रैमी अवॉर्ड, दुनिया भर में बना चर्चा का विषय
नई दिल्ली। बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने अपने प्रेरणादायक और अर्थपूर्ण जीवन में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ ली है। 90 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया है, जो शायद ही किसी ने सोचा हो। 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में दलाई लामा ने अपना पहला ग्रैमी जीतकर फिर सुर्खियों में आ गए हैं।
यह सम्मान उन्हें उनके खास ऑडियो प्रोजेक्ट 'मेडिटेशन: द रिफ्लेक्शन्स ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा' के लिए मिला है।इस उपलब्धि के बाद दलाई लामा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा, "मैं यह सम्मान कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। मैं इसे व्यक्तिगत चीज के तौर पर नहीं देखता, बल्कि इसे हमारी साझा सार्वभौमिक जिम्मेदारी की पहचान मानता हूं। मेरा सच में मानना है कि शांति, करुणा, हमारे पर्यावरण की देखभाल, और मानवता की एकता की समझ सभी आठ अरब इंसानों की सामूहिक भलाई के लिए जरूरी हैं। मैं आभारी हूं कि यह ग्रैमी सम्मान इन संदेशों को और ज्यादा लोगों तक फैलाने में मदद कर सकता है।"
दलाई लामा को यह ग्रैमी बेस्ट ऑडियोबुक, नरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग कैटेगरी में मिला। इस अवॉर्ड की घोषणा ग्रैमी के प्री-टेलीकास्ट समारोह में की गई थी, जिसे यूट्यूब पर लाइव भी दिखाया गया।खास बात यह रही कि यह पहला मौका था जब किसी विश्व-प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु को इस श्रेणी में ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दलाई लामा खुद समारोह में मौजूद नहीं थे, इसलिए उनकी ओर से यह अवॉर्ड मशहूर सिंगर और सॉन्गराइटर रूफस वेनराइट ने स्वीकार किया, जो इस प्रोजेक्ट का हिस्सा भी रहे हैं। अगर इस ऑडियो प्रोजेक्ट की बात करें, तो यह सिर्फ एक एल्बम नहीं है, बल्कि एक अनुभव है। इसमें बोले गए मेडिटेशन, दलाई लामा की शिक्षाएं और संगीत का बेहद सुंदर मेल देखने को मिलता है। इस एल्बम का संगीत हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से प्रेरित है, जो सुनने वाले को शांति, आत्मचिंतन और मानसिक संतुलन की अनुभूति कराता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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