यूपी मतदाता सूची पर भ्रम: चुनाव आयोग ने स्पष्ट की नाम जांचने की प्रक्रिया, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एसआईआर 2026 के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर मतदाताओं के बीच सवाल और चिंताएं सामने आ रही हैं। इसी बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) उत्तर प्रदेश ने सोशल मीडिया के जरिए वोटर लिस्ट में नाम जांचने की पूरी प्रक्रिया को सरल भाषा में स्पष्ट किया है। सीईओ यूपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बताया कि अगर कोई भी व्यक्ति यह जानना चाहता है कि उसका नाम 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में है या नहीं, तो इसके लिए दो आसान तरीके मौजूद हैं।
यहां भी ईपिक नंबर और कैप्चा भरकर सर्च करने पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम होने या न होने की स्थिति साफ हो जाएगी। इसी मुद्दे पर सीईओ यूपी ने एक अन्य 'एक्स' पोस्ट के जरिए यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति का नाम नई जगह की वोटर लिस्ट में जुड़ा ही नहीं है, तो यह कहना सही नहीं है कि उसका नाम दोनों जगहों से काट दिया गया है। अगर कोई मतदाता नई जगह शिफ्ट हुआ है, तो वह अपने नए पते के आधार पर फॉर्म-6 भर सकता है। सीईओ के मुताबिक, एसआईआर का अभी केवल प्रारंभिक चरण पूरा हुआ है और इसका असली परिणाम फाइनल वोटर लिस्ट होगी। ड्राफ्ट लिस्ट में नाम आया या नहीं आया, इससे ज्यादा अहम यह है कि नाम फाइनल वोटर लिस्ट में हो। बता दें कि कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने इसे जनहित का मामला बताते हुए कहा था कि वोटर लिस्ट से नाम कटने की समस्या सिर्फ उनकी नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के करीब 2.17 करोड़ नागरिक इससे प्रभावित हो सकते हैं।
गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा था कि अगर पुराने पते से नाम काटकर नए पते पर जोड़ा जाता, तो कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन समस्या यह है कि कई मामलों में नाम दोनों जगहों से हटा दिया गया है। उनका दावा था कि एसआईआर प्रक्रिया में नए पते पर नाम शिफ्ट करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने चुनाव आयोग से सवाल किया था कि जब यह मामला लगभग 15 प्रतिशत वोटरों से जुड़ा है, तो इसे ईपिक नंबर से जोड़कर आसान क्यों नहीं बनाया गया। पहले फॉर्म-8 के जरिए वोटर आसानी से अपना पता बदल सकते थे, फिर एसआईआर में यह व्यवस्था क्यों नहीं रखी गई और सीधे नाम हटाने का रास्ता क्यों अपनाया गया।
