अंकिता भंडारी कांड: मुख्यमंत्री धामी द्वारा सीबीआई जांच के आदेश का प्रवासी संगठनों ने किया स्वागत
मुजफ्फरनगर। दिल्ली में सक्रिय प्रवासी उत्तराखंडी संगठनों, राज्य हितैषी कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अंकिता भंडारी कांड की सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के निर्णय का स्वागत किया है।
आज इस संबंध में चिन्हित राज्य अधिकारी संघ समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेन्द्र प्रताप एवं कांग्रेस के पूर्व सैनिक सचिव हरिपाल रावत द्वारा संयुक्त बयान जारी किया गया। बयान में कहा गया कि यद्यपि यह निर्णय काफी विलंब से लिया गया है, लेकिन यदि आंदोलनकारियों द्वारा व्यापक और निरंतर संघर्ष न किया गया होता तो इस प्रकरण को दबाने का प्रयास किया जा रहा था।
दोनों नेताओं ने मांग की कि सीबीआई जांच को “टाइम-बाउंड” किया जाए तथा इसकी स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए। साथ ही उन्होंने अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि इस जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी सक्रिय न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए, ताकि न्याय प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार से अपील की कि वह आंदोलनकारियों की भावनाओं का सम्मान करे।
इस बैठक में प्रवासी आंदोलनकारी संगठनों की ओर से प्रमुख रूप से हरिपाल रावत, धीरेन्द्र प्रताप, अनिल पंत, जगत सिंह बिष्ट, मनोज आर्य, जगदीश कुकरेती, पत्रकार कुशाल जीना एवं हरीश राणा उपस्थित रहे।
उधर, धीरेन्द्र प्रताप ने अलग से जारी बयान में इसे उत्तराखंड की जनता की जीत बताया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि आंदोलनकारी अपने संघर्ष कार्यक्रमों को जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष से मुलाकात करेगा, तथा इसी क्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग को भी ज्ञापन सौंपा जाएगा।
