JNU में 'नफरत की राजनीति' पर प्रशासन का डंडा, मोदी-शाह के खिलाफ नारेबाजी करने वाले छात्र होंगे कैंपस से बाहर
नई दिल्ली (New Delhi):
"नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे" जेएनयू प्रशासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जारी एक कड़े बयान में कहा, "विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र हैं, उन्हें नफरत फैलाने की प्रयोगशाला में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।" प्रशासन ने आगे कहा कि बोलने की आजादी एक मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी भी तरह की हिंसा, गैरकानूनी आचरण या देश विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त किया जाए।
FIR दर्ज, छात्रों की हुई पहचान विश्वविद्यालय के सुरक्षा विभाग की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। जेएनयू प्रशासन ने वसंत कुंज (नॉर्थ) थाना पुलिस को लिखे पत्र में JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा सहित कई छात्रों के नाम दिए हैं। प्रशासन का दावा है कि ये नारे सोचे-समझे, बार-बार दोहराए गए और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने वाले थे (क्योंकि यह प्रदर्शन उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के विरोध में था)।
विपक्ष और JNUSU का पलटवार दूसरी ओर, जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने इन आरोपों को निराधार बताया है। अध्यक्ष अदिति मिश्रा का कहना है कि यह प्रदर्शन साल 2020 की हिंसा की याद में आयोजित एक 'मशाल जुलूस' था और नारेबाजी वैचारिक थी, न कि किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ। विपक्ष ने भी सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का आरोप लगाया है।
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