1 अप्रैल से आयकर का 'डिजिटल हंटर': घर में 10 लाख से ज्यादा कैश रखा तो खैर नहीं, अफसरों को मोबाइल-WhatsApp चेक करने की मिली खुली छूट
नई दिल्ली : नया वित्त वर्ष (1 अप्रैल 2026) करदाताओं के लिए न केवल राहत बल्कि कई कड़े प्रावधान भी लेकर आ रहा है। नया 'आयकर अधिनियम 2025' जहाँ एक तरफ मध्यम वर्ग को राहत दे रहा है, वहीं टैक्स चोरी और फर्जी क्लेम करने वालों के लिए यह 'काल' बनकर आया है। सरकार ने इसमें कई ऐसे कड़े प्रावधान जोड़े हैं जिनसे अब बच निकलना नामुमकिन होगा। 'आयकर अधिनियम 2025' के तहत सरकार ने नकद लेनदेन को हतोत्साहित करने और डिजिटल पारदर्शिता लाने के लिए कुछ ऐसे नियम बनाए हैं, जो हर आम और खास आदमी को प्रभावित करेंगे।
- ₹12.75 लाख तक कोई टैक्स नहीं: नए नियमों के अनुसार, नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत अब ₹12 लाख तक की वार्षिक आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है। यानी प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख तक की आय पर टैक्स लायबिलिटी 'शून्य' हो जाएगी।
-
सेक्शन 87A के तहत भारी छूट: सरकार ने सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स रिबेट (छूट) को ₹25,000 से बढ़ाकर सीधे ₹60,000 कर दिया है। यह मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी राहत है।
-
नया 'टैक्स ईयर' कॉन्सेप्ट: अब 'असेसमेंट ईयर' और 'प्रीवियस ईयर' जैसे उलझाने वाले शब्दों को खत्म कर दिया गया है। अब सिर्फ एक 'टैक्स ईयर' (Tax Year) होगा, जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलेगा।
-
सीनियर सिटीजन्स को दोहरा लाभ: बुजुर्गों के लिए बैंक और पोस्ट ऑफिस के ब्याज पर TDS की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दी गई है। इसके अलावा, नेशनल सेविंग स्कीम (NSS) से निकासी को भी अब टैक्स-फ्री कर दिया गया है।
-
किराये पर राहत: किराये के भुगतान पर TDS काटने की सीमा को ₹2.4 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख कर दिया गया है, जिससे छोटे व्यापारियों और किराएदारों को बड़ी राहत मिलेगी।
-
ये है नए कानून की सख्तियां
-
- घर में कैश रखने की सीमा और जांच: नए कानून के तहत, यदि किसी व्यक्ति के घर पर 10 लाख रुपये या उससे अधिक की नकदी पाई जाती है और वह उसका वैध स्रोत (Source) नहीं बता पाता, तो उस पर भारी कर और पेनाल्टी लगाई जाएगी। हालांकि कैश रखने की कोई कानूनी सीमा तय नहीं है, लेकिन 10 लाख से ऊपर की राशि पर विभाग की सक्रियता बढ़ जाएगी , ऐसा पाए जाने पर 85 प्रतिशत की पेनल्टी लग सकती है।
2. 20 हज़ार से ऊपर का नकद लेन-देन मना है:
-
लोन और डिपॉजिट: अब किसी भी व्यक्ति से चाहे वो कोई रिश्तेदार ही क्यों न हो , 20,000 रुपये या उससे अधिक का नकद कर्ज (Loan) लेना या वापस करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा करने पर ली गई राशि के बराबर (100%) जुर्माना देना होगा।
-
संपत्ति का सौदा: जमीन या मकान की खरीद-फरोख्त में 20,000 रुपये से अधिक का नकद एडवांस या भुगतान करना अब आपको आयकर विभाग के रडार पर ले आएगा।
3. अब आपका 'मोबाइल' भी चेक कर सकेंगे अफसर: नए कानून की धारा 247 सबसे विवादित और शक्तिशाली है। इसके तहत सर्च (छापेमारी) के दौरान आयकर अधिकारियों को आपके 'वर्चुअल डिजिटल स्पेस' तक पहुँचने का कानूनी अधिकार मिल गया है।
-
ईमेल और सोशल मीडिया: अधिकारी आपके निजी ईमेल, व्हाट्सएप चैट और सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगाल सकेंगे।
-
पासवर्ड देना अनिवार्य: यदि अधिकारी जांच के दौरान आपसे आपके मोबाइल या लैपटॉप का पासवर्ड मांगते हैं, तो आपको वह देना होगा। इनकार करने पर इसे 'जांच में बाधा' माना जाएगा, जिसके लिए जेल की सजा भी हो सकती है।
-
क्लाउड स्टोरेज: अब डेटा केवल कंप्यूटर में छिपाने से काम नहीं चलेगा, विभाग आपकी गूगल ड्राइव और क्लाउड स्टोरेज की भी जांच कर सकेगा।
4. 2 लाख रुपये का 'यूनिवर्सल' नकद नियम: किसी भी एक व्यक्ति से, एक दिन में, किसी एक ट्रांजैक्शन के लिए 2 लाख रुपये या उससे अधिक नकद लेना अब नामुमकिन होगा। यदि आप ऐसा करते हैं, तो प्राप्तकर्ता को पूरी राशि के बराबर जुर्माना भरना पड़ेगा।
नये कानून के 5 सबसे कड़े प्रावधान (Strict Rules):
1. फर्जी डिडक्शन (Fake Claims) पर भारी जुर्माना: अब तक कई लोग मकान किराया भत्ता (HRA) या अन्य फर्जी रसीदें लगाकर टैक्स बचाते थे। नए कानून में अगर कोई क्लेम फर्जी पाया जाता है, तो उस पर 200% का भारी जुर्माना और गंभीर मामलों में 7 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है।
2. डिजिटल फुटप्रिंट की 'सर्जिकल स्ट्राइक': अब आयकर विभाग आपके बैंक खातों के अलावा आपके सोशल मीडिया पोस्ट (महंगी छुट्टियां, लग्जरी कारें), क्रेडिट कार्ड खर्च और विदेश यात्राओं के डेटा को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए ट्रैक करेगा। अगर आपका खर्च आपकी घोषित आय से मेल नहीं खाता, तो तुरंत नोटिस आएगा।
3. TDS नियमों में सख्ती: अब लगभग हर बड़े डिजिटल लेनदेन पर TDS अनिवार्य कर दिया गया है। अगर किसी कंपनी या व्यक्ति ने समय पर TDS जमा नहीं किया, तो उन पर प्रतिदिन के हिसाब से भारी पेनल्टी लगेगी और उनकी संपत्तियां भी कुर्क की जा सकती हैं।
4. मुकदमों की तुरंत सुनवाई (Fast Track Trials): टैक्स चोरी के पुराने मामलों को सालों तक खींचने की परंपरा खत्म होगी। नए कानून के तहत विशेष 'टैक्स ट्रिब्यूनल' बनेंगे जो 6 महीने के भीतर मामले का निपटारा करेंगे। यानी अब कोर्ट-कचहरी के चक्कर में राहत नहीं, बल्कि तुरंत सजा मिलेगी।
5. 'ब्लैक लिस्ट' का प्रावधान: बार-बार टैक्स नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों या व्यक्तियों को 'ब्लैक लिस्ट' किया जाएगा। ऐसे लोग भविष्य में कभी सरकारी ठेका (Tenders) नहीं ले पाएंगे और न ही उन्हें बैंकों से कोई लोन मिल सकेगा।
विशेषज्ञों की राय: आर्थिक जानकारों का कहना है कि सरकार अब 'AI' (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग कर रही है। आपका मोबाइल और सोशल मीडिया प्रोफाइल यह बताएगा कि आप कितना खर्च कर रहे हैं, और आपका टैक्स रिटर्न बताएगा कि आप कितना कमा रहे हैं। दोनों में अंतर होने पर तुरंत कार्रवाई होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन उत्तर भारत का प्रमुख हिंदी दैनिक है, जो पाठकों तक स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरें तेज़, सटीक और निष्पक्ष रूप में पहुँचाता है, हिंदी पत्रकारिता का एक भरोसेमंद मंच !
