यूपी में मतदाता सूची का 'सर्जिकल स्ट्राइक': 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटे, सियासी गलियारों में मचा हड़कंप
लखनऊ (Lucknow) | नई दिल्ली:
नाम कटने के मुख्य कारण: मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह अब तक का सबसे बड़ा क्लीनअप अभियान था। हटाए गए नामों का ब्यौरा इस प्रकार है:
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स्थानांतरित/गायब मतदाता: 2.17 करोड़
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मृतक मतदाता: 46.23 लाख
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डुप्लीकेट पंजीकरण: 25.47 लाख
शहरों में सबसे ज्यादा असर: हैरानी की बात यह है कि सबसे ज्यादा नाम शहरी इलाकों में कटे हैं। राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक 30% नाम हटाए गए हैं। इसके बाद गाजियाबाद (28%), कानपुर (25%), प्रयागराज (24%) और गौतमबुद्ध नगर (23.7%) का नंबर आता है।
विपक्ष हमलावर, सत्ता पक्ष संतुष्ट: ड्राफ्ट जारी होते ही उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि जानबूझकर खास वर्गों और जातियों के नाम काटे गए हैं। कांग्रेस ने इसे 'भेदभावपूर्ण' बताते हुए इसके खिलाफ जन आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि यह एक पारदर्शी प्रक्रिया है और फर्जी वोटरों को बाहर करना लोकतंत्र के हित में है।
क्या करें अगर आपका नाम कट गया है? चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम सूची में नहीं हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
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6 फरवरी 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
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नाम जुड़वाने के लिए Form-6 भरना होगा।
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अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 6 मार्च 2026 को किया जाएगा।
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