मेरठ के आर्मी बेस कैंप पर अलकायदा की फिदायीन हमले की थी साजिश, यूपी ATS और J&K पुलिस का हाई-अलर्ट
वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा था उजैद कुरैशी ; घर पर नोटिस देख स्कूटी से हुआ फरार, CCTV वीडियो आया सामने
मेरठ। क्रांतिधरा मेरठ में आतंकी संगठन अलकायदा की गहरी पैठ और सेना के ठिकानों पर फिदायीन हमले की एक खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। खुफिया एजेंसियों (IB), यूपी एटीएस (ATS) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त जांच में मेरठ निवासी मोहम्मद उजैद कुरैशी का आतंकी कनेक्शन सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि उजैद मेरठ कैंट स्थित आर्मी बेस कैंप और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर आत्मघाती हमले की फिराक में था।
सुरक्षा एजेंसियों को एक संदिग्ध वॉट्सऐप ग्रुप का पता चला था, जिसका एडमिन उजैद बताया जा रहा है। इस ग्रुप के जरिए वह न केवल सुरक्षा बलों पर सुसाइडल अटैक की प्लानिंग कर रहा था, बल्कि युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेल रहा था। जम्मू-कश्मीर से पकड़े गए एक युवक के मोबाइल से सेना पर हमले के सनसनीखेज चैट मिलने के बाद एजेंसियों के होश उड़ गए।
छापेमारी और उजैद का फरार होना
18 जनवरी को एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गुपचुप तरीके से मेरठ के कोतवाली क्षेत्र स्थित बनियापाड़ा में उजैद के घर दबिश दी। उजैद घर पर नहीं मिला, जिस पर टीम ने उसके दो भाइयों से पूछताछ की और घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया। एक चौंकाने वाला CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें उजैद स्कूटी से घर आता है, नोटिस पढ़ता है और फिर संदिग्ध परिस्थितियों में फरार हो जाता है।
फल व्यापार की आड़ में आतंकी नेटवर्क!
जांच में पता चला कि उजैद नवंबर 2024 में अपने पिता के फल व्यापार के सिलसिले में जम्मू-कश्मीर गया था। एजेंसियों को शक है कि इसी दौरान उसने अलकायदा के संदिग्ध तत्वों से संपर्क साधा और स्लीपर सेल के रूप में सक्रिय हुआ। फिलहाल मेरठ कैंट और आसपास के संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उजैद की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।
कैसे बुना गया 'उजैद' के आतंक का जाल?
1. जम्मू-कश्मीर कनेक्शन: फल व्यापार या आतंकी नेटवर्क? जांच एजेंसियों के मुताबिक, उजैद नवंबर 2024 में अपने पिता के फल कारोबार के सिलसिले में जम्मू-कश्मीर गया था। खुफिया सूत्रों का दावा है कि व्यापार की आड़ में उजैद ने वहां सीमा पार से सक्रिय आतंकी हैंडलर्स और स्लीपर सेल के सदस्यों से मुलाकात की। एजेंसियों को संदेह है कि यहीं से उसे 'फिदायीन हमले' (आत्मघाती हमले) के लिए उकसाया गया और जरूरी इनपुट दिए गए।
2. वॉट्सऐप ग्रुप: डिजिटल ब्रेनवॉश का अड्डा उजैद जिस वॉट्सऐप ग्रुप का एडमिन/सक्रिय सदस्य था, वह बेहद खतरनाक ढंग से काम कर रहा था।
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कार्यशैली: इस ग्रुप में सीधे तौर पर हिंसा की बात करने के बजाय पहले धार्मिक भावनाओं को भड़काया जाता था।
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टारगेट: ग्रुप में शामिल युवाओं का 'ब्रेनवॉश' करने के लिए सेना के ऑपरेशन्स के एडिटेड वीडियो और भ्रामक जानकारी साझा की जाती थी।
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साजिश: इसी ग्रुप की चैट में मेरठ कैंट के संवेदनशील नक्शों और आर्मी गेट की गतिविधियों पर चर्चा मिली है, जिससे 'फिदायीन अटैक' की योजना की पुष्टि होती है।
3. 'एक मैसेज' की मिस्ट्री: हैरानी की बात यह है कि उजैद ने हाल के दिनों में ग्रुप पर केवल 'एक मैसेज' किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'साइलेंट मोड' रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके, लेकिन तकनीकी सर्विलांस (Cyber Monitoring) ने उसकी पोल खोल दी।
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