यूपी में मौसम का महा-तांडव: मेरठ में आसमानी बिजली से चर्च दहला, मुज़फ्फरनगर में 67 बिजलीघर ठप, सहारनपुर से नोएडा तक 'कोल्ड अटैक'
मुजफ्फरनगर / मेरठ / लखनऊ (रॉयल बुलेटिन विशेष)। उत्तर प्रदेश के लिए शुक्रवार और शनिवार की रात किसी कुदरती इम्तिहान से कम नहीं रही। हिमालयी क्षेत्रों से आए सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने पूरे वेस्ट यूपी और ब्रज क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। मेरठ में ऐतिहासिक चर्च पर बिजली गिरने से लेकर सहारनपुर में जनजीवन ठप होने तक, कुदरत के इस बदले मिजाज ने शासन और प्रशासन दोनों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। शुक्रवार (23 जनवरी) को सक्रिय हुए शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के चलते मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर सहित वेस्ट यूपी के 20 से अधिक जिलों में भारी बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई।
मेरठ: आकाशीय बिजली का खौफनाक मंजर
मुजफ्फरनगर में बिजली सिस्टम ध्वस्त: 67 बिजलीघर ठप, सुरेंद्रनगर में ट्रांसफार्मर पर गिरी बिजली
शुक्रवार को मौसम ने अचानक ऐसा यू-टर्न लिया कि पूरा जनपद कांप उठा। तड़के से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने जहाँ प्रदूषण से राहत दी, वहीं बिजली विभाग के मेंटेनेंस के दावों की हवा निकाल दी। बारिश के कारण शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई, जिससे आधे से ज्यादा शहर को 'ब्लैकआउट' का सामना करना पड़ा।
पहली बारिश में ही बिजली विभाग की खुली पोल
बारिश शुरू होते ही शामली रोड, भगत सिंह रोड, अंसारी रोड, टाउन हॉल, रेलवे रोड और नई मंडी समेत कई प्रमुख इलाकों की बत्ती गुल हो गई। मेंटेनेंस के नाम पर लाखों खर्च करने वाले विभाग की पोल पहली ही बारिश ने खोल दी। बिजली न होने का सीधा असर जलापूर्ति पर पड़ा और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए।

मौसम के इस तांडव का सबसे बुरा असर मुजफ्फरनगर के बिजली सप्लाई सिस्टम पर पड़ा है। शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने पावर कॉर्पोरेशन की कमर तोड़ दी। जनपद के लगभग 67 बिजलीघरों में एक साथ ब्रेकडाउन होने से शहर से लेकर देहात तक अंधेरा पसर गया।
आसानी बिजली का कहर: मुजफ्फरनगर के सुरेंद्रनगर इलाके में उस वक्त बड़ा हादसा टल गया जब एक चालू ट्रांसफार्मर पर आकाशीय बिजली आ गिरी। बिजली गिरने से ट्रांसफार्मर का लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester) पूरी तरह डैमेज हो गया। मुख्य अभियंता विनोद गुप्ता के अनुसार, यदि अरेस्टर न होता तो बड़ा धमाका हो सकता था।
लाखों का नुकसान और टूटे पोल: तेज हवाओं के कारण जौली रोड, मखियाली, बधाईकलां, रोहाना और सुजडू जैसे क्षेत्रों में दर्जनों बिजली के पोल धराशायी हो गए और हाईटेंशन लाइन के तार टूटकर जमीन पर आ गिरे। टाउन हॉल रोड, नुमाइश कैंप, गांधी कॉलोनी, रुड़की रोड और मंडी समिति जैसे प्रमुख बिजलीघरों से घंटों सप्लाई बंद रही।
मुख्य अभियंता का निरीक्षण: बारिश रुकते ही मुख्य अभियंता विनोद गुप्ता खुद सड़कों पर उतरे और विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से पावर कॉर्पोरेशन को लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ है। विभाग की टीमों ने युद्धस्तर पर काम करते हुए देर शाम तक शहर और देहात की सप्लाई को सुचारू कराया।
राज्यमंत्री कपिल देव ने लगाई फटकार
शहर में व्यापक स्तर पर बिजली ठप होने की खबर मिलते ही राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने तत्काल बिजली विभाग के आला अधिकारियों को फोन पर जमकर फटकार लगाई। मंत्री ने सख्त निर्देश दिए कि अधिकारी खुद सड़कों पर उतरकर पेट्रोलिंग करें और फाल्ट ठीक कर जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल करें।
किसानों के लिए बारिश बनी 'अमृत'
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह बारिश गेहूं की फसल के लिए 'अमृत' के समान है। सहायक पौध संरक्षण अधिकारी ने बताया कि इस बारिश से गेहूं का दाना मोटा होगा और फसलों से प्रदूषण का असर कम होगा। हालांकि, तेज हवाओं के कारण पोपलर के पेड़ों और सरसों की अगेती फसल को मामूली नुकसान की आशंका है। कृषि विभाग ने फिलहाल फसलों पर किसी भी तरह के कीटनाशक स्प्रे न करने की सलाह दी है।
जलभराव से जनता बेहाल
बारिश के चलते हृदय स्थल शिव चौक, रुड़की रोड और भोपा रोड पर भारी जलभराव की स्थिति बनी रही, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।
सहारनपुर और देवबंद: 'बसंत' में 'बरसात' का सितम
जनपद सहारनपुर में शुक्रवार सुबह से शुरू हुआ झमाझम बारिश का सिलसिला शनिवार तड़के तक रुक-रुक कर जारी रहा। पिछले कई दिनों से खिली धूप के कारण लोगों को कड़ाके की ठंड से जो राहत मिली थी, वह इस बारिश के बाद फिर से ठिठुरन में बदल गई है। बारिश के कारण आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा और सड़कों पर आवाजाही नाममात्र की रही। लोग केवल अति-आवश्यक कार्यों के लिए ही घरों से बाहर निकले।
पतंगबाजी पर फिरा पानी, देवबंद में बिजली संकट: बसंत ऋतु की शुरुआत के साथ पतंगबाजी के लिए उत्साहित युवाओं के अरमानों पर बादलों ने पानी फेर दिया। देवबंद में हालात और भी चुनौतीपूर्ण रहे, जहाँ बारिश के चलते पूरे दिन बाजारों में सन्नाटा रहा और बिजली आपूर्ति ठप रहने से लोगों को पानी की भारी किल्लत झेलनी पड़ी।
आध्यात्मिक महत्व: शास्त्रों के अनुसार, बसंत ऋतु के आगमन पर वर्षा होना समृद्धि का सूचक है। माना जाता है कि बसंत पंचमी के आसपास होने वाली हल्की और शांत बारिश मां सरस्वती की विशेष कृपा का प्रतीक है, जो समाज में ज्ञान, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाती है।
फसलों पर 'ओलों' की मार: किसानों की बढ़ी धड़कनें
बागपत, मुजफ्फरनगर और मेरठ के ग्रामीण इलाकों में हुई ओलावृष्टि ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेरने का काम किया है।
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सरसों और आलू: खिले हुए सरसों के फूल ओलों के कारण गिर गए हैं, जिससे पैदावार घटने का डर है।
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गेहूं के लिए सलाह: कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जहाँ ओले नहीं गिरे, वहां तो फायदा है, लेकिन जहाँ पानी भर गया है, वहां किसानों को जल निकासी (Drainage) की व्यवस्था तुरंत करनी चाहिए वरना जड़ें गल सकती हैं।
वैज्ञानिक कारण: क्यों हुआ ऐसा?
मौसम विभाग के अनुसार, भूमध्य सागर से आने वाली नमी युक्त हवाएं (Western Disturbance) जब हिमालय के कम दबाव वाले क्षेत्र से टकराईं, तो यूपी के ऊपर एक 'साइक्लोनिक सर्कुलेशन' बना। इसी कारण गरज-चमक के साथ बारिश हुई। 23 जनवरी को पिछले 10 सालों में इस समय की सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
आगामी भविष्यवाणी (Long-range Forecast):
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24 जनवरी (आज): सुबह घना कोहरा रहेगा। दोपहर तक बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में बूंदाबांदी हो सकती है।
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25-27 जनवरी: आसमान तो साफ होगा, लेकिन तापमान में 3-5 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट आएगी। यानी 'कड़ाके की शीतलहर' (Severe Cold Wave) वापसी करेगी।
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