चंद्रशेखर आजाद ने बैरिकेड तोड़ी, बाइक से पहुँचे कपसाड़
मेरठ/गाजियाबाद। मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण का मामला राजनैतिक तूल पकड़ चुका है। गाजियाबाद के यूपी गेट पर नगीना के सांसद चंद्रशेखर को रोकने के लिए सैकड़ों की संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके अलावा अलग—अलग स्थानों पर थाना प्रभारी और एसीपी भी लगाए गए थे। लेकिन पुलिस सांसद चंद्रशेखर को रोकने में नाकाम रही। पुलिस ने चंद्रशेखर की एस्कॉर्ट को अपने कब्जे में ले लिया। तो वो अपनी गाड़ी से उतरकर पैदल ही दौड़ पड़े। सांसद को पकड़ने केे लिए पुलिसकर्मियों ने दौड़ लगाई लेकिन वो हॉफ गए। सांसद कुछ दूर आगे चलकर एक बाइक में बैठे और सीधे मेरठ के सरधना क्षेत्र के गांव कपसाड़ के लिए निकल गए। सांसद चंद्रशेखर खेतों और गांव के रास्तों से होते हुए कपसाड़ पहुंचे।
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद (भीम आर्मी चीफ) पीड़ित परिवार से मिलने के लिए बाइक पर बैठकर कपसाड़ के अंदर पहुंच गए। हालांकि सांसद चंद्रशेखर के कपसाड़ पहुंचने की सूचना के बाद गांव के हर तरफ अभेद नाकेबंदी की गई थी। सांसद और अन्य राजनैतिक दलों के नेताओं को पुलिस ने गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिए दो किलोमीटर से पहले बैरिकेडिंग की थी। लेकिन वह पुलिस से बचते हुए मोटरसाइकिल से दूसरे रास्ते से वहां पहुंचे।
चंद्रशेखर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह घटना मेरठ जिले के सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव की बड़ी शर्मसार है। उन्होंने कहा कि एक दलित महिला की हत्या कर दी गई और उनकी बेटी का अपहरण कर लिया गया, जिसके बाद गांव में तनाव का माहौल है।
घटना पर रोष व्यक्त करते हुए आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। पुलिस अभी तक युवती को बरामद नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के घर पर चलने वाला बुलडोजर अब कहां छिप गया।
उन्होंने पहले वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित परिवार से बात की थी और न्याय का आश्वासन दिया था। गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था और बैरिकेडिंग की गई थी, जिसके कारण अन्य नेताओं को भी पहुंचने में मुश्किल हुई।
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
