साधु या सेठ? माघ मेले में ‘पोर्शे बाबा’ का जलवा, तपस्या के साथ टॉप-गियर!
प्रयागराज। प्रयागराज में माघ मेला लगा है, श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगा रहे हैं, कोई मोक्ष की तलाश में है… और इसी बीच एक बाबा ऐसे भी हैं, जिनकी साधना अब सीधा शोरूम से निकलकर मेले में एंट्री कर रही है। जी हां, बात हो रही है संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा, जिनके ठाठ-बाट देखकर बड़े-बड़े धन्ना सेठ भी सोच में पड़ जाएं।
इस बार माघ मेले में बाबा के काफिले में पोर्शे कार शामिल हो गई है—कीमत बताई जा रही है 3 करोड़ से ज्यादा। यानी साधना के साथ-साथ अब स्पीड और स्टाइल भी पूरी! इससे पहले बाबा के पास लैंड रोवर डिफेंडर पहले से मौजूद थी, जिसकी कीमत भी करोड़ों में है। लगता है, बाबा की तपस्या अब लक्ज़री सेगमेंट में पहुंच चुकी है।
खास बात यह रही कि माघ मेला शिविर में पहुंची इस पोर्शे कार का विधि-विधान से पूजन किया गया। कार को माला पहनाई गई, जयकारे लगे, और साधु-संत मौजूद रहे। ऐसा दृश्य मानो यह संदेश दे रहा हो कि—अब वाहन नहीं, वाहन भी आशीर्वाद पाते हैं।
सतुआ बाबा काशी के पीठाधीश्वर और जगतगुरु महामंडलेश्वर हैं। आंखों पर रे-बैन का चश्मा, चलने को डिफेंडर, और अब काफिले में पोर्शे—साफ है कि बाबा की दिनचर्या में वैराग्य कम और ब्रांड वैल्यू ज्यादा दिखाई दे रही है।
हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ये करोड़ों की गाड़ियां किसके नाम पर खरीदी गई हैं। लेकिन सवाल वही पुराना है—जब संतों की पहचान त्याग से होती है, तो फिर यह लग्ज़री किस साधना का फल है?माघ मेले में जहां आम श्रद्धालु दान-पुण्य और तपस्या की बात कर रहा है, वहीं सतुआ बाबा की पोर्शे यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि—आज के दौर में मोक्ष का रास्ता शायद डिफेंडर से होकर पोर्शे तक जाता है।
