नई दिल्ली। मोदी कैबिनेट ने वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक 10 मार्च से शुरू हो रहे संसद सत्र में पेश किया जा सकता है। वक्फ बिल में कई अहम संशोधन किए गए हैं, जिसमें वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने, वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और अवैध कब्जों को रोकने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
अगस्त 2024 में यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष के भारी विरोध के कारण इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के पास भेज दिया गया। 13 फरवरी 2025 को JPC की रिपोर्ट संसद में पेश की गई।
इस रिपोर्ट के आधार पर बिल में संशोधन कर नया ड्राफ्ट तैयार किया गया। मोदी कैबिनेट ने इस संशोधित बिल को मंजूरी दे दी है और इसे अब संसद में पेश किया जाएगा।
पश्चिम में हाईकोर्ट की पीठ बनाने की मांग फिर उठी, कई विधायकों ने भी उठाया मामला
JPC की 655 पन्नों की रिपोर्ट में कई अहम सिफारिशें की गई हैं, जिनमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी वक्फ प्रबंधन में शामिल करने का प्रस्ताव। वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित किया जाएगा। जिला मजिस्ट्रेट को वक्फ संपत्तियों की देखरेख में अधिक अधिकार दिए जाएंगे। वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। वक्फ संपत्तियों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा। बेहतर ऑडिटिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। अवैध कब्जों को रोकने और वक्फ संपत्तियों के अनधिकृत ट्रांसफर पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान। वक्फ न्यायाधिकरण की शक्तियों में विस्तार। महिला प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया जाएगा। वक्फ संरचना में बदलाव का प्रस्ताव।
मुज़फ्फरनगर में छात्रों के दो गुटों में मारपीट, बढ़ा तनाव, भाकियू ने मामला सुलझाने की शुरू की पहल
कांग्रेस का कहना है कि “JPC रिपोर्ट में विपक्ष के सुझावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया।”यह बिल देश हित में नहीं है और इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।” विपक्षी दलों का यह भी आरोप है कि सरकार वक्फ कानून में ऐसे बदलाव कर रही है, जो वक्फ संपत्तियों की स्थिति को कमजोर कर सकते हैं।