देश की जेन-जी भाजपा के विकास मॉडल पर करती है सबसे ज्यादा भरोसा: पीएम मोदी
मालदा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मालदा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराया।उन्होंने कहा कि इस सपने को साकार करने में पूर्वी भारत की भूमिका सबसे अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दशकों तक पूर्वी भारत को नफरत और भ्रम की राजनीति में उलझाकर रखा गया, लेकिन अब इन राज्यों ने विकास की राजनीति को अपनाया है।
खासतौर पर मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड सफलता मिली है। यानी पहले जहां कभी भाजपा के लिए चुनाव जीतना असंभव माना जाता था, वहां भी भाजपा को अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भी भाजपा का मेयर बना है। पीएम मोदी ने कहा कि यह दिखाता है कि देश की जेन-जी भाजपा के विकास मॉडल पर भरोसा कर रही है। विपक्ष पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह चाहते हैं कि बंगाल के हर गरीब परिवार को पक्का घर मिले और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ लोगों तक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार केंद्र से भेजे गए गरीबों के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं होने दे रही है।
आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज बंगाल देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां यह योजना लागू नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इससे गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है और इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। प्रधानमंत्री ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत लाखों परिवारों ने अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल शून्य किया है और इसके लिए केंद्र सरकार ने हजारों करोड़ रुपए जारी किए हैं। वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल के लाखों परिवार भी इस योजना का लाभ उठाएं, लेकिन राज्य सरकार इस पर आगे नहीं बढ़ रही है।
मालदा और पश्चिम बंगाल के विकास को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जाएंगे। उन्होंने खासतौर पर मालदा की 'मैंगो इकोनॉमी' को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का वादा किया। जूट किसानों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले जूट का समर्थन मूल्य करीब 2400 रुपए था, जो अब बढ़कर साढ़े पांच हजार रुपये से अधिक हो गया है। 2014 से पहले के दस वर्षों में जूट किसानों को केवल 400 करोड़ रुपए मिले थे, जबकि पिछले 11 वर्षों में यह राशि बढ़कर 1300 करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है।
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