विशेष सम्पादकीय- सात समंदर पार भी सुरक्षित नहीं बेटियां; ऐनम खान की मौत ने उजागर किया शिक्षित समाज का 'जहरीला' चेहरा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऐनम खान की सऊदी अरब के जेद्दा में हुई संदिग्ध मौत ने एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई को हमारे सामने लाकर खड़ा कर दिया है, जिसे हम अक्सर 'प्रगतिशील' होने के मुखौटे के पीछे छुपा लेते हैं। एक होनहार बेटी, जो कंप्यूटर कोड्स की गुत्थियों को सुलझाती थी, वह खुद दहेज और प्रताड़ना के उस आदिम मकड़जाल में उलझकर दम तोड़ देगी, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है।
डिग्रियों से बड़ी दहेज की भूख
अक्सर कहा जाता है कि शिक्षा समाज की कुरीतियों को खत्म करती है। लेकिन ऐनम के मामले में आरोपी पति खुद एक इंजीनियर है और मृतका भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर थी। जब समाज का सबसे शिक्षित वर्ग 'किया' (KIA) कार मिलने के बाद 'इनोवा' के लिए अपनी गर्भवती पत्नी को लहूलुहान करने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि हमारी शिक्षा पद्धति में कहीं कोई बहुत बड़ा छेद है। यह 'इंजीनियर' मानसिकता उस अनपढ़ अपराधी से कहीं ज्यादा खतरनाक है, जो अपनी दरिंदगी को रसूख और रईसी के पर्दे में छुपा लेता है।
विदेशी धरती और बेबसी का फायदा
ऐनम का मामला उस 'एनआरआई' (NRI) सिंड्रोम का भी शिकार है, जहाँ बेटियां सरहदों के पार जाकर बिल्कुल अकेली पड़ जाती हैं। लखनऊ से हजारों किलोमीटर दूर जेद्दा में जब उस पर जुल्म हो रहा था, तो उसके पास न तो अपने पिता का कंधा था और न ही भाइयों का सहारा। आरोपी पति आमिर खान ने शायद इसी बेबसी का फायदा उठाया। विदेश में रहने वाले भारतीय परिवारों में जब हिंसा होती है, तो भाषा, कानून और समाज के डर से बेटियां अक्सर चुप्पी साध लेती हैं। ऐनम ने अंतिम समय में अपने पिता को फोन कर सिसकते हुए जो दर्द बयां किया था, वह हर उस पिता के लिए चेतावनी है जिसकी बेटी विदेशी जमीन पर बसने का सपना देख रही है।
कानूनी पेचीदगियां और न्याय की डगर
जब अपराध सात समंदर पार होता है, तो न्याय की डगर कांटों भरी हो जाती है। ऐनम के पिता शेर अली, जो खुद पुलिस विभाग (फायर सर्विस) में हैं, उन्हें अपनी बेटी का शव वतन वापस लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। यदि वे जागरूक न होते, तो शायद आरोपी पति सबूतों को जेद्दा की रेत में ही दफन कर देता। अब चिनहट पुलिस के सामने चुनौती है कि वे उन वैज्ञानिक साक्ष्यों (पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट) को अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनाएं ताकि आरोपी को उसके किए की सजा मिल सके।
समाज को अब जागना होगा
हम कब तक अपनी बेटियों की अर्थियों पर शोक मनाते रहेंगे? क्या 'अच्छे घर' और 'पढ़े-लिखे वर' की तलाश में हम अपनी बेटियों को भेड़ियों के हाथ में नहीं सौंप रहे? यह समय केवल शोक मनाने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन का है। दहेज के लोभियों का सामाजिक बहिष्कार और विदेशी विवाहों में कठोर कानूनी जांच ही भविष्य की 'ऐनम' को बचा सकती है।
ऐनम खान की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मिले वो पांच जख्म सिर्फ उसके शरीर पर नहीं, बल्कि हमारे तथाकथित सभ्य समाज के माथे पर पांच गहरे कलंक हैं। न्याय की इस लड़ाई में रॉयल बुलेटिन ऐनम के परिवार के साथ खड़ा है, क्योंकि खबर देना हमारा पेशा है, लेकिन न्याय के लिए आवाज उठाना हमारा धर्म है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
