कानपुर: मार्क जुकरबर्ग और एलन मस्क बनकर ₹1.57 करोड़ की ठगी, रिटायर्ड टीचर शिकार

कानपुर । कानपुर से साइबर ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ जालसाजों ने दुनिया के दिग्गज अरबपतियों का नाम इस्तेमाल कर एक रिटायर्ड महिला टीचर को चूना लगा दिया। आज, 17 मार्च 2026 को कानपुर पुलिस की साइबर सेल ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ठगों ने मार्क जुकरबर्ग (Facebook/Meta CEO) और एलन मस्क (Tesla/X CEO) का फर्जी प्रोफाइल बनाकर पीड़िता से ₹1.57 करोड़ की ठगी की।
कैसे हुई ठगी?
1. सोशल मीडिया पर दोस्ती: ठगों ने फेसबुक पर मार्क जुकरबर्ग के नाम से एक फर्जी प्रोफाइल बनाई और कानपुर की रिटायर्ड टीचर को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। खुद को जुकरबर्ग बताकर उसने विश्वास जीता और फिर एलन मस्क का 'करीबी दोस्त' बनकर उनसे चैट शुरू की।
2. कानपुर में स्कूल बिजनेस का झांसा: ठग ने महिला को बताया कि वह और एलन मस्क मिलकर कानपुर में एक वर्ल्ड-क्लास चैरिटेबल स्कूल और बिजनेस प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं। महिला को इस प्रोजेक्ट का 'लोकल पार्टनर' और 'डायरेक्टर' बनाने का लालच दिया गया।
3. कस्टम क्लियरेंस और पाउंड का ड्रामा: जालसाज ने कहा कि उसने लंदन से लाखों पाउंड और कीमती तोहफे भेजे हैं। इसके बाद, गिरोह के अन्य सदस्यों ने 'कस्टम अधिकारी' बनकर महिला को कॉल किया और पार्सल छुड़ाने के नाम पर अलग-अलग टैक्स, मनी लॉन्ड्रिंग सर्टिफिकेट और एंटी-टेररिज्म क्लीयरेंस के बहाने पैसे ऐंठने शुरू किए।
4. ₹1.57 करोड़ का ट्रांजेक्शन: रिटायर्ड शिक्षिका ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी, पीएफ का पैसा और गहने बेचकर कुल 1.57 करोड़ रुपये ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब ठगों ने और पैसों की मांग की, तब महिला को ठगी का अहसास हुआ।
पुलिस की कार्रवाई
कानपुर की साइबर सेल ने जांच में पाया है कि ठगी के तार नाइजीरियाई गैंग और दिल्ली के कुछ लोकल सप्लायर्स से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस उन बैंक खातों को फ्रीज करने की कोशिश कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे।
साइबर एक्सपर्ट की सलाह: "कोई भी बड़ा सेलिब्रिटी या अरबपति सोशल मीडिया पर रैंडम लोगों से बिजनेस पार्टनरशिप नहीं करता। पार्सल छुड़ाने के नाम पर किसी भी अज्ञात खाते में पैसे न भेजें।"
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

टिप्पणियां