लखनऊ एयरपोर्ट पर 8.55 करोड़ की ड्रग्स जब्त: मस्कट से लाया गया गांजा, आरोपी जेल भेजा गया

लखनऊ। लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अमौसी एयरपोर्ट) पर सीमा शुल्क विभाग (Customs Department) ने तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की नशीली दवाओं की खेप पकड़ी है। मस्कट से आए एक यात्री के पास से भारी मात्रा में विदेशी गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 8.55 करोड़ रुपये आंकी गई है।
संदिग्ध यात्री की पहचान और तलाशी
लखनऊ एयरपोर्ट पर मस्कट (ओमान) से आने वाली फ्लाइट से एक यात्री उतरा। ग्रीन चैनल पार करते समय कस्टम अधिकारियों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ। जब उसके सामान की एक्स-रे जांच की गई, तो बैग के भीतर कुछ संदिग्ध पैकेट दिखाई दिए।
वैक्यूम पॉलीबैग में छिपाया था नशा
जब यात्री के बैग को खोलकर गहन तलाशी ली गई, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। बैग के अंदर 17 वैक्यूम सीलबंद पॉलीबैग रखे थे। तस्करों ने 'वैक्यूम पैकिंग' तकनीक का इस्तेमाल इसलिए किया था ताकि नशीले पदार्थ की तीखी गंध बाहर न आए। स्निफर डॉग्स (खोजी कुत्ते) इसे सूंघ न सकें। कम जगह में ज्यादा माल पैक किया जा सके।
हाई-क्वालिटी 'विदेशी गांजा' (Marijuana)
जांच करने पर इन बैगों से कुल 5.7 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला विदेशी गांजा बरामद हुआ। नशीले पदार्थों के विशेषज्ञों के अनुसार, यह साधारण गांजा नहीं बल्कि हाइब्रिड किस्म का 'मारिजुआना' है, जिसकी डिमांड बड़े शहरों की रेव पार्टियों में बहुत अधिक होती है।
NDPS एक्ट के तहत मामला
कस्टम विभाग ने यात्री को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद उसके खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पूछताछ में तस्कर ने कबूल किया कि वह इसे लखनऊ और दिल्ली के एजेंटों को सप्लाई करने वाला था। आज उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
तस्करी का 'मस्कट-लखनऊ' कनेक्शन
जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि मस्कट में इस गिरोह का मास्टरमाइंड कौन है। लखनऊ एयरपोर्ट का इस्तेमाल हाल के दिनों में सोने (Gold) और ड्रग्स की तस्करी के लिए एक 'ट्रांजिट रूट' के रूप में बढ़ा है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
कस्टम अधिकारी का बयान
"यह इस साल की सबसे बड़ी ड्रग्स बरामदगी में से एक है। तस्कर अब आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन हमारी 'रिस्क प्रोफाइलिंग' और सर्विलांस टीम लगातार ऐसे प्रयासों को नाकाम कर रही है।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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