"बाप का, चाचा का, ताऊ का... सबका बदला ले लिया!", विक्की त्यागी की हत्या से सुर्ख़ियों में आये सागर मलिक के पिता की हत्या कर बोला हमलावर
बहावड़ी का 'रक्तचरित्र': ढोल बजाने की रंजिश में अब तक 11 लाशें, सागर के पिता की हत्या के बाद गांव में सुरक्षा कड़ी
बागपत/शामली। "बाप का, चाचा का, ताऊ का... सबका बदला ले लिया!"—मंगलवार की रात बागपत के दोघट में जब गोलियों की तड़तड़ाहट थमी, तो एक हमलावर के ये शब्द सुनकर बरातियों की रूह कांप गई। बहावड़ी गांव की जिस रंजिश ने कभी कुख्यात डॉन विक्की त्यागी को कोर्ट रूम के भीतर खत्म करवा दिया था, उसी रंजिश ने आज एक और जान ले ली। हिस्ट्रीशीटर विवेक उर्फ विक्की मलिक की हत्या महज एक कत्ल नहीं, बल्कि तीन दशकों से चले आ रहे उस 'रक्तचरित्र' का नया अध्याय है, जिसमें अब तक 11 लोग दफन हो चुके हैं।
एक समझौता, एक ढोल और फिर शुरू हुआ मौत का तांडव
पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों पहले दोनों पक्षों में समझौता हो गया था। लेकिन साल 2010 के प्रधानी चुनाव ने सब कुछ बदल दिया। चुनाव जीतने के बाद बिजेंद्र पक्ष ने विवेक के घर के बाहर देर तक ढोल बजवाया। हार की टीस और घर के बाहर बजते ढोल ने रंजिश की सोई हुई आग को फिर से भड़का दिया। इसके बाद 2011 में बिजेंद्र, 2014 में देवेंद्र और 2016 में धर्मेंद्र की हत्या हुई। इसी बीच 2015 में डॉन विक्की त्यागी को सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह विरोधी पक्ष (दरियाव पक्ष) की मदद कर रहा था।
विक्की त्यागी हत्याकांड: जब 16 साल के लड़के ने दहलाया था यूपी
इस पूरी रंजिश का सबसे बड़ा मोड़ 16 फरवरी 2015 को आया था। मुजफ्फरनगर की कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, तभी वकील की ड्रेस पहनकर आए एक किशोर ने कुख्यात डॉन विक्की त्यागी पर अंधाधुंध गोलियां बरसाकर उसे मौत के घाट उतार दिया था। वह किशोर कोई और नहीं, बल्कि इसी विवेक मलिक का बेटा सागर मलिक था।
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हत्या की वजह: विक्की त्यागी खुद बहावड़ी गांव की इस रंजिश में कूद पड़ा था और वह विवेक मलिक के विरोधी 'दरियाव पक्ष' की मदद कर रहा था।
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नतीजा: पिता (यशपाल) की हत्या का बदला लेने और परिवार को बचाने के लिए सागर ने यूपी के सबसे बड़े डॉन को खत्म कर दिया। तब से सागर और उसका भाई सौरभ जेल में हैं।
यशपाल की मौत के बाद देवर से हुई थी बबली की शादी
इस कहानी का भावुक पहलू यह है कि वर्ष 2000 में बबली के पहले पति यशपाल मलिक की हत्या हुई थी। तब उनके दो मासूम बेटे थे—सागर और सौरभ। समाज के फैसले पर बबली की शादी उनके देवर विवेक (मृतक) से कराई गई। विवेक ने ही दोनों बेटों को पाला, जिन्होंने बाद में मुजफ्फरनगर कोर्ट में वकील बनकर विक्की त्यागी को गोलियों से भून दिया था।
चश्मदीद की जुबानी: "मैं चिल्लाता हुआ भागा, वो गोलियां बरसाते रहे"
विवेक के साथ आए चश्मदीद विपिन बालियान ने बताया, "हम पार्किंग में थे, तभी घात लगाकर बैठे हमलावरों ने पीछे से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। मैं बचाने दौड़ा लेकिन उन्होंने रुकने का नाम नहीं लिया। मैं चिल्लाता हुआ बरातियों की तरफ भागा।" शोर सुनकर लोग दौड़े तो हमलावर भागने लगे, जिसमें से गांव के ही रजत को भीड़ ने दबोच लिया।
क्राइम सीन और सिर में 4 गोलियां: हत्यारों पर सवार था खून
बुधवार को पुलिस आरोपी रजत को लेकर 'धूम सिंह फार्म हाउस' की पार्किंग में पहुंची और क्राइम सीन दोहराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हमलावरों की नफरत साफ कर दी—विवेक के सिर में 4 गोलियां उतार दी गई थीं। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार करीब 15-20 राउंड फायरिंग हुई। पुलिस को आरोपी के मोबाइल से व्हाट्सएप कॉल और साजिश की कई अहम कड़ियां मिली हैं।
बहावड़ी रंजिश: कब-किसकी हुई हत्या (टाइमलाइन)
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1998-2000: रंजिश की शुरुआत, यशपाल मलिक (सागर के असली पिता) की हत्या।
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2011: प्रधान बिजेंद्र की हत्या (शादी से लौटते वक्त)।
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2014: बिजेंद्र के भाई देवेंद्र का कत्ल।
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2015: मुजफ्फरनगर कोर्ट में डॉन विक्की त्यागी की हत्या (सागर मलिक द्वारा)।
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2016: धर्मेंद्र की हत्या।
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2026 (11 मार्च): विवेक उर्फ विक्की मलिक की बागपत में हत्या।
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