मुजफ्फरनगर में 'गैस चैंबर' जैसे हालात: मार्च में कोहरे और प्रदूषण का तांडव, AQI 278 पहुंचा, शून्य विजिबिलिटी से थमी रफ्तार
मिड-मार्च में जहरीली धुंध ने उड़ाए होश, सांस लेना हुआ दूभर
मुजफ्फरनगर। जनपद में कुदरत और प्रदूषण के जानलेवा मेल ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुधवार सुबह जब लोग सोकर उठे, तो नजारा दिसंबर की कड़ाके की ठंड जैसा था। मार्च के मध्य में, जहाँ सूरज की तपिश महसूस होनी चाहिए थी, वहाँ घने कोहरे और जहरीले प्रदूषण की चादर ने पूरे शहर को ढंक लिया। सुबह 8 बजे मुजफ्फरनगर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 278 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है।
सड़कों पर 'जीरो विजिबिलिटी', रेंगते नजर आए वाहन रात तक आसमान साफ था, लेकिन सुबह अचानक आए इस बदलाव ने मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया। घने कोहरे के कारण दृश्यता (Visibility) शून्य तक पहुंच गई, जिससे नेशनल हाईवे और शहर की मुख्य सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। विजिबिलिटी न होने के कारण वाहन चालक हेडलाइट जलाकर रेंगते हुए आगे बढ़ते नजर आए। हवा की रफ्तार महज 3 किमी प्रति घंटा होने के कारण प्रदूषण के कण आसमान में ही जम गए।
ये भी पढ़ें मुज़फ्फरनगर में मुठभेड़ के बाद पुलिस पर फायरिंग करने वाला रंगबाज गिरफ्तार; तितावी पुलिस की बड़ी कामयाबीअवैध फैक्ट्रियां और केमिकल गोदाम बने 'जहर' की वजह!
ये भी पढ़ें संसद में हंगामे के बीच विपक्ष का सरकार पर हमला, किसानों व अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा की मांगस्थानीय निवासियों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। आरोप है कि भोपा रोड, चरथावल रोड, जौली रोड और जानसठ रोड स्थित अवैध केमिकल गोदामों, पुराने टायर जलाने वाली फैक्ट्रियों और पेपर मिलों से निकलने वाले धुएं ने हवा को जहरीला बना दिया है। स्थानीय निवासी राजकली देवी ने बताया कि सुबह बाहर निकलने पर आंखों में तेज जलन और गले में खराश महसूस हुई। PM2.5 और PM10 कणों का उच्च स्तर फेफड़ों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी: मास्क ही बचाव
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में घुले जहरीले कणों के कारण सांस के मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को सीने में भारीपन और सांस लेने में दिक्कत हो रही है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि जब तक धुंध साफ न हो, लोग घरों से बाहर निकलने पर N-95 मास्क का प्रयोग जरूर करें।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
हैरानी की बात यह है कि स्थिति इतनी गंभीर होने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस गाइडलाइन या अवैध फैक्ट्रियों पर कार्रवाई का आदेश जारी नहीं हुआ है। सूरज की तपिश भी इस प्रदूषण की मोटी चादर को चीरने में नाकाम साबित हो रही है।
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