मुजफ्फरनगर में शिक्षा का अधिकार के तहत 514 बच्चों को मिले स्कूल, वंचित छात्रों को एक ओर मौका
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दूसरे चरण की ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया संपन्न
मुजफ्फरनगर। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दूसरे चरण की ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया मंगलवार को सफलतापूर्वक पूरी हो गई। जनपद के निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश के लिए इस बार 514 बच्चों का भाग्य चमका है। बेसिक शिक्षा विभाग अब इन चयनित बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।
प्रवेश के लिए प्राप्त हुए थे 961 आवेदन
बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) संदीप कुमार ने आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि द्वितीय चरण में कुल 1210 आवेदन प्राप्त हुए थे। खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा की गई स्क्रूटनी में 961 आवेदन पात्र पाए गए, जबकि दस्तावेजों में कमी के चलते 249 आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। लॉटरी के बाद पात्र आवेदनों में से 514 बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए हैं, जबकि 447 छात्र सीट उपलब्धता के अभाव में इस चरण में विद्यालय पाने से वंचित रह गए।
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विभाग ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2026 को आधार मानकर निम्नलिखित आयु वर्ग के बच्चों को पात्रता दी गई है। मसलन नर्सरी के लिए 3 से 4 वर्ष, एलकेजी के लिए 4 से 5 वर्ष, यूकेजी के लिए 5 से 6 वर्ष और कक्षा 1 के लिए 6 से 7 वर्ष तय है।
तीसरे चरण का मौका
जिन अभिभावकों के बच्चों का चयन दूसरे चरण में नहीं हो पाया है, उनके लिए एक और अवसर शेष है। बीएसए संदीप कुमार ने बताया कि तीसरे चरण के आवेदन 12 मार्च से 25 मार्च 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे। इस अंतिम चरण की लॉटरी 27 मार्च को निकाली जाएगी। अभिभावक विभागीय पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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