मुजफ्फरनगर: धुंध की चादर में लिपटा शहर, थम गई रफ्तार
जनजीवन और यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित
मुजफ्फरनगर। मौसम की करवट ने आम जनमानस को हैरान कर दिया है। जहाँ मार्च के महीने में सूरज की तपिश तेज होने लगती है, वहीं बुधवार की सुबह मुजफ्फरनगर समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में घने कोहरे की चादर बिछी रही। दो दशक में दूसरी बार मार्च में ऐसी धुंध देखने को मिली है, जिससे जनजीवन और यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही।
मुजफ्फरनगर समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुबह के समय दृश्यता इतनी कम थी कि वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर रेंगते हुए चलना पड़ा। हाईवे और शहर की मुख्य सड़कों पर वाहनों की गति पर जैसे ब्रेक लग गए हों। कार्यालय जाने वाले लोगों और स्कूल बसें चलाने वाले चालकों को खासी मशक्कत का सामना करना पड़ा। धुंध की सघनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ मीटर की दूरी पर भी कुछ देख पाना मुश्किल था।
क्या कहता है मौसम विज्ञान?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च में इस तरह का घना कोहरा एक असामान्य घटना है, लेकिन यह पूरी तरह से प्राकृतिक है। वातावरण में नमी का अधिक होना और पश्चिमी विक्षोभ के चलते धूल भरी हवाओं का मिलन इस कोहरे का कारण बना है। दिल्ली-एनसीआर, मेरठ और मुजफ्फरनगर जैसे शहरों में इस 'असामान्य धुंध' ने तापमान में गिरावट के साथ-साथ एक धुंधली सुबह का अहसास कराया है।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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