मुजफ्फरनगर में विकास के दावों का निकला दम, 'रॉयल बुलेटिन' के सर्वे में 1.5 लाख से अधिक लोगों ने खोला कच्चा चिट्ठा, शहरवासी है परेशान
मुजफ्फरनगर। जनपद में विकास का ढोल पीटने वाले जनप्रतिनिधियों और 'ट्रिपल इंजन' सरकार के दावों की हवा निकल गई है। 'रॉयल बुलेटिन' के महा-सर्वे ने वह सच सामने ला दिया है, जिसे सत्ता की चकाचौंध में दबाया जा रहा था। सैकड़ों कमेंट्स, लाखों व्यूज और चीख-चीख कर अपनी बदहाली सुनाती मुजफ्फरनगर की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि शहर स्मार्ट नहीं, बल्कि 'नर्क' बनता जा रहा है।
'रॉयल बुलेटिन' द्वारा किए गए सर्वे और रियलिटी चेक ने मुजफ्फरनगर की राजनीति में भूचाल ला दिया है। पिछले 24 घंटों में 1,51,354 से अधिक जागरूक नागरिकों ने इन खबरों को देखा और सैकड़ों लोगों में से लगभग सभी ने तीखे कमेंट्स के जरिए प्रशासन की कार्यप्रणाली को 'जीरो' करार दिया है।
जनता का वार: "लूट का अड्डा बनी नगर पालिका"
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: आयुष्मान देव सिंह ने UCEED-2026 में लहराया परचम, हासिल की 16वीं ऑल इंडिया रैंकजनता का सीधा आरोप है कि नगर पालिका अब केवल नेताओं, ठेकेदारों और दलालों की तिजोरियां भरने का माध्यम रह गई है। अर्पित माहेश्वरी ने तंज कसते हुए लिखा— "पहले सड़क बनती है, फिर नाले खोदे जाते हैं, फिर सड़क बनती है, फिर खंभे लगाए जाते हैं और फिर सड़क बनती है। ऐसा विकास हम देख पा रहे हैं, बहुत सौभाग्यवान हैं हम।" अमित तिवारी ने हमला बोलते हुए कहा कि ट्रिपल इंजन की सरकार और इसके विकास के दावे फेल हैं, विकास तो केवल चेयरमैन पति और उनके चेलों का हुआ है। वहीं, प्रदीप तायल और शुभम गोयल जैसे कुछ लोगों ने इन कमेंट्स को नकारते हुए कहा कि शहर में पहले से हालात बेहतर हुए हैं, पर लोगों को तसल्ली नहीं होती। रघुराज सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कमीशनखोरी ने पूरा देश बर्बाद कर दिया, इस पालिका को तो बंद ही कर देना चाहिए। तुषार माहेश्वरी ने आक्रोश व्यक्त किया कि नेताओं को रोज नई गाड़ी चाहिए, इसीलिए इतनी लूट मची है। सौम्या गुप्ता ने वसुंधरा रेजिडेंसी के बाहर की दुर्दशा पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
आदि जैन का कहना है— "काम तो हो रहा है, प्रयास भी ठीक-ठाक है, लेकिन भ्रष्टाचार ने नगर पालिका को लूट का अड्डा बना दिया है। हर 15 दिन में नया खुलासा होता है।" उन्होंने डीएम से सवाल पूछा कि क्या तंग नागरिक अब भूख हड़ताल करें, तभी कुछ होगा? वहीं, सुनील बहल का मानना है कि दिक्कतें तो हैं, पर जनता को भी सहयोग करना चाहिए।
सड़कों पर 'सत्ता' का कब्जा, गलियों में 'गोबर' और 'गंदगी'
शांति नगर, अंबा विहार और मिमलाना रोड की जनता पिछले 15 सालों से सड़क का इंतजार कर रही है। संजय पाल और विकास वर्मा के कमेंट्स ने जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता को उजागर किया है। राम कुमार और विनोद जैन जैसे नागरिकों ने बताया कि कैसे बचन सिंह कॉलोनी और प्रेमपुरी में अवैध डेयरी और गोबर ने रास्तों पर चलना दूभर कर दिया है, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदकर सोया है। अंसारी रोड के व्यापारी राममेहर रोहिला ने बाजार में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा न होने पर नाराजगी जताई। तरुण तायल ने दर्द साझा किया कि पालिका वाले पहले घर भरने में यकीन रखते हैं। रीमा गुप्ता और गोविन्द शर्मा इंसा ने भी बढ़ते भ्रष्टाचार पर निराशा जताई।
नेताओं का 'चॉकलेट' वाला चुनावी खेल
दिनेश सैनी ने चेतावनी दी कि नेता चुनाव में 'चॉकलेट' बांटने आएंगे और जनता को दारू-मुर्गे में खरीदने की कोशिश करेंगे, लेकिन इस बार जनता हिसाब मांग रही है। अजीत सिंह प्रजापति, मो. इरशाद राजपूत और आशु त्यागी ने प्रभारी मंत्री और चेयरमैन के रिपोर्ट कार्ड को 'जीरो' बताते हुए तीनों इंजनों को 'फिसड्डी' करार दिया। अवनीश मलिक का दर्द छलका कि कार्यकाल किसी का भी हो, आम आदमी के हिस्से सिर्फ नर्क आया है। उन्होंने लिखा— "वोटिंग मशीन में NOTA का बटन खामखां नहीं दिया है, इसका उपयोग करना चाहिए।"
सर्वे की विश्वसनीयता पर छिड़ी बहस
डॉक्टर श्रीश भारद्वाज ने सर्वे के तरीके पर सवाल उठाते हुए लिखा कि अंदाजे से सर्वे करने पर ऐसे ही रिजल्ट्स आएंगे। वहीं, वीरेन्द्र सिंह ने रॉयल बुलेटिन पर ही सवाल उठा दिया कि सांसद से सवाल क्यों नहीं पूछा जा रहा। इस पर रॉयल बुलेटिन ने स्पष्ट किया कि हम निष्पक्षता के साथ हर पहलू को जनता के सामने रख रहे हैं। देखे उनका सवाल और रॉयल बुलेटिन का जवाब-
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रॉयल बुलेटिन की गूंज: अब जवाब देना ही होगा
इस सर्वे ने साफ कर दिया है कि मुजफ्फरनगर की जनता अब केवल 'रील' वाले विकास से खुश होने वाली नहीं है। सुषमा सिंह और अशोक त्रिपाठी ने कहा कि केवल 'रॉयल बुलेटिन' में ही वह दम है जो बिना डरे सत्ता से तीखे सवाल पूछ सकता है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है—या तो काम होगा, या 2027 में जनता अपना 'इंजन' खुद बदलेगी। सौरभ मित्तल, शहराब, जितेंद्र सिंह हुड्डा और बलजीत सिंह लकी समेत अनेक पाठकों ने इस मुहिम के लिए आभार जताया। भूपेंद्र गोयल ने A2Z रोड पर नवनिर्मित नाले की दुर्दशा के समाधान की मांग की।
इन नागरिकों ने भी खोला मोर्चा
वसीम खान, पराग शीलान, कांति प्रसाद त्यागी, रजत चौधरी, राजेश कुमार, विपिन कुमार, ऋषिपाल सिंह, अनिल कुमार धीमान, मनोज वर्मा, उदयवीर सिंह, नाजिम अहमद, ऐजाज अंसारी, मो. शावेज सिद्दीकी, नौशाद मोहम्मद, समर अंसारी, आदित्य शीतल, वीरेन्द्र कुच्छल, दीपक कुमार शर्मा, मो. गुलजार, विपिन हिंदुत्व, आशीष चौहान, संजीव जैन, शाहबाद इलाही, शुभ गोयल, मुबारक अली, चौ. उदित त्यागी, मो. आरिफ सैफी, अकिल चौधरी, सुरेंद्र कुमार, जग शोरन सिंह, विजय कुमार, अनुज पंडित, मोहित पाल, धीर सिंह, अनिल कुमार पिपैल, शुभम बालियान, मोहित कश्यप, साजिद अंसारी, राहुल बालियान, सुनील सूद, संदीप गर्ग, ज़िद्दी बादशाह, अजय पंडित, अंकित पाल कैलाशी, शिव वर्मा, विकास वर्मा, राजीव कर्णवाल, डॉ. महबूब अली, प्रतीक त्यागी, असद खान रियल, सचिन चौहान, बबीत केडिया, संदीप दिव्यांग, रामा सैनी, पल्लवी ठाकुर, मोनी मोनिका, मो. सैफ, प्रवीण कुमार, फिरोज खान, मुकुल चौधरी, निशांत जैन, मोहित धीमान, अनुराग गर्ग, रूपा अहलावत, सन्नवर अहमद, अमित गर्ग, अवतोष शर्मा, मुदित कुमार अग्रवाल, दीपक वर्मा, जितेंद्र कुमार पाल, मोनू रावण ब्रह्मपुरिया, मो. नईम, सचिन देव, मालती अग्रवाल, अंकित कुमार, जहीर आलम, सुनील शर्मा, मो. तारिक फारूकी, आशु ठाकुर, वीरेंद्र शर्मा, मनोहर लाल, मोहन लाल, देव जी, अरशद अली, शिव ओम, रजत राठी, गौरव मित्तल, देवेंद्र पाल सिंह त्यागी, राजीव गुप्ता, शाहजाद रंगरेज, विनोद जैन, राम कुमार, शिल्पी विकास, इरफान अल्वी इंसान, इंजी. राजेंद्र साहनी, शमीम मलिक, शावेज अंसारी, मनीषा सिंघल, गुलाब चौधरी, उमर कुरैशी, अश्वनी सोनी, शिवम नामा, खान रेहान, जिया रहमान, दयाल प्रॉपर्टी वर्क सिंघल, चौधरी अंकुर राठी, डिंपल सैनी, संजना चौधरी, पुष्पलता अधिवक्ता, माला हरि गुप्ता, नीरज मेहरा, तिलक धीमान, प्रकाश सूना, शान मलिक, संजय वर्मा, संजय बंसल, कमल जैदी, मो. अतहर, सुबोध त्यागी और मांगे राम शर्मा।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
हजारों लोगों के इस गुस्से और आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि मुजफ्फरनगर में विकास केवल फाइलों तक सीमित है। शांति नगर, अंबा विहार और गांधी कॉलोनी जैसी जगहों पर जलभराव और टूटी सड़कें आज भी नरकीय जीवन का एहसास करा रही हैं। जनता अब जुमलों से नहीं, धरातल पर समाधान चाहती है। आज के सर्वे भी दे अपनी राय-
मुज़फ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक का 'रिपोर्ट कार्ड': पौने 2 साल की परीक्षा में 'पास' या 'फेल'? दीजिये अपनी राय ! फेसबुक के इस पेज पर आपकी राय का रहेगा इन्तजार-https://www.facebook.com/royalbulletin
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https://royalbulletin.in/muzaffarnagar/against-muzaffarnagar-municipality/article-156225
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